चुनावी महाभारत 2019- कृष्ण कहाँ हैं? अर्जुन पुकार रहे!

लोकसभा चुनाव 2019 का ऐलान हो चुका है। 11 अप्रैल से चुनाव शुरू होंगे। परिणाम 23 मई को घोषित होंगे। 2014 में आई मोदी सरकार के 5 वर्ष पूरे होने वाले हैं। सरकार को जो करना था वो कर लिया। किसी के हाथ लॉलीपॉप लगा तो किसी को मिला झुनझुना-- ऐसा लोगों का मानना है। हालाँकि सरकार का कहना है कि हमने 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे को चरितार्थ कर दिया है। हाँ, प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न देकर ये बात मोदी जी ने जरूर साबित कर दिया है कि वो सबका साथ सबका विकास करना चाहते हैं। काँग्रेस भले ही अटल जी को भारत रत्न ना दे पायी हो लेकिन भाजपा सरकार ने प्रणब मुखर्जी को ये सम्मान देकर कांग्रेसियों को कुछ तारीफ करने का मौका तो दे ही दिया है। 

महाभारत अगर आपको याद हो तो वहाँ एक ही दुर्योधन थे जो सत्ता की खातिर कुछ भी हथकंडे अपनाने को तैयार थे। वर्तमान में भी कई हथकंडे अपनाये जा रहे हैं, वो बात अलग है कि आज के महाभारत में एक नहीं कई दुर्योधन हो गए हैं। लेकिन मुझे लगता है कि सत्ता के लोभी इन दुर्योधनों को कुछ हासिल नहीं होगा क्योंकि इस बार अर्जुन को जिताने के लिए एक नहीं बल्कि करोड़ों कृष्ण खड़े हैं, और वो करोड़ों कृष्ण हैं भारत की जनता।

इतिहास में शायद ये पहली बार हुआ होगा कि सत्ता पक्ष को बदनाम करने के लिए अलग- अलग प्रपंच किये गए हों। चाहे वो असहिष्णुता हो या अवार्ड वापसी या फिर विदेश में जाकर भारत की बुराई करना। सत्ता पक्ष की आलोचना करना जरूरी है, खूब करिए लेकिन अपने देश के बारे में पाकिस्तान में जाकर ये कहना कि मोदी जी को हटाइये, ना तो तर्कसंगत है और ना ही समझदारी।

ये भी पढ़िए: मंदिर वहीं बनाएंगे।

बरसों से हिंदुस्तान, अपने सांस्कृतिक विरासत के कारण जाना जाता रहा है। आज जब मोदी जी के शासन में एक नए भारत का उदय हो रहा है तो बहुत से लोगों को मिर्ची लगने लगी है।  उन सभी लोगों से मैं बस इतना कहना चाहूँगा कि भाई मिर्ची लग रही है तो मिठाई खाओ, अरे नहीं, तुम्हें तो वो भी हज़म नहीं होगा। डायबिटीज जो है तुम लोगों को। 

चलिए और विस्तार से लिखेंगे अगले पोस्ट में । मेरा लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। 
और हाँ, एक बार फिर से दोहरा दूँ, 2019 में आएंगे तो मोदी जी ही।
पोस्ट पसंद आई हो तो  फेसबुक 
पर मेरा पेज जरूर लाइक कीजिए।

जय भारत। जय हिंद।
©नीतिश तिवारी।