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Showing posts from January, 2021

गुनाह-ए-इश्क़ की सजा मिलेगी या रिहाई होगी?

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Pic credit: pinterest.  Art work: self.   उसकी ख़्वाहिश मक़बूल की थी, उसे हार था पहनाया, मेरी इस दिलदारी का उसने खूब था फायदा उठाया, मेरे क़त्ल की तारीख़ उसने कुछ यूँ मुक़र्रर कर दी, उसने शादी का न्योता अपने यार से था भेजवाया। Uski khwahish maqbool ki thi, use haar tha pahnaya, Meri iss dildaari ka usne khoob tha fayada uthaya, Mere qatl ki tareekh usne kuch yun mukarrar kar di, Usne shadi ka nyota apne yaar se tha bhejwaya. इश्क़ की अदालत में हूँ, आज मेरे मोहब्बत की सुनवाई होगी, गुनाह-ए-इश्क़ की सजा मिलेगी या आज मेरी रिहाई होगी, मुक़दमा हो गया तो क्या मुझे आज भी भरोसा है उस पर, जरा पता तो करो यारों, वो ये सब देखने जरूर आई होगी। Ishq ki adalat mein hu, aaj mere mohabbat ki sunwai hogi, Gunaah-e-ishq ki saja milegi ya aaj meri rihai hogi, Muqadama ho gaya toh kya, mujhe aaj bhi bharosa hai uss par, Jara pata toh karo yaaron, wo ye sab dekhne jarur aayi hogi. ©नीतिश तिवारी। ये भी देखिए:

और फिर दिल को बड़ा आराम था।

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तेरी मोहब्बत के कर्ज को अदा कर देता, मैं तेरी ख़ातिर दूर से ही सजदा कर लेता, जो तुमने अपनी मजबूरियाँ बताई होती तो, मैं खुद को तुझसे जुदा भी कर लेता। Teri mohbbat ke karz ko ada kar deta, Main teri khatir door se hi sajda kar leta, Jo tumne apni majbooriyan batai hoti toh, Main khud ko tujhse juda bhi kar leta. तुझसे किए वादे का एहतराम था, इसलिए मेरे हाथ में जाम था, सारे आशिक़ बुलाये थे महफ़िल में और पूरा सब इंतज़ाम था, सबने तफ़सील से सुनाई अपने हिज़्र-ए-मोहब्बत की दास्तान, तेरी ग़ैरहाज़री में तेरा भी ज़िक्र हुआ, और फिर दिल को बड़ा आराम था। Tujhse kiye wade ka ehtaraam tha, isliye mere haath mein jaam tha, Saare aashiq bulaye the mehfil mein aur poora sab intzaam tha, Sabne tafseel se sunai apne hizr-e-mohbbat ki dastaan, Teri gair hazaro mein tera bhi zikar hua, Aur phir dil ko bada aaram tha. ©नीतिश तिवारी। मेरी शायरी परफॉर्मेंस जरूर देखें।

पहले इश्क़ का आख़िरी अंज़ाम।

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  तुम चार दिन के इश्क़ में ही बेवफ़ा हो गए। और एक हम जो बरसों तक तुमसे कभी खफ़ा ना हुए। पहले इश्क़ का आख़िरी अंज़ाम शायद यही होना था। Tum chaar din  Ke ishq mein hi Bewafa ho gaye. Aur ek hum jo Barson tak tumse Kabhi khafa na huye. Pahle ishq ka Akhiri anzaam Shayad yahi hona tha. भ्रम ये कि  तुम मेरे हो, सत्य ये कि ये सत्य नहीं है। Bhram ye ki Tum mere ho, Satya ye ki ye Satya nahi hai. ©नीतिश तिवारी।

लघुकथा-घर की पंचायत।

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बेनीवाल जी अपने पंचायत के सरपंच रह चुके थे। अपने चार बच्चों में से तीन की शादी करने के बाद छोटी लड़की की शादी के लिए योग्य वर की तलाश में थे।  "आजकल अच्छे लड़के मिलते कहाँ हैं हजारी जी" बेनीवाल जी ने अपने बचपन के साथी और सुख दुख के सहयोगी हजारी जी के साथ अपनी चिंता ज़ाहिर किया। "अरे मिलेंगे कैसे नहीं, आप प्रयास ही नहीं कर रहे हैं। मैंने बोला था आपसे कि अपने फौजी बेटे से बात करो। वो भी तो सरकारी नौकरी में है। कोई ना कोई उसका यार दोस्त होगा सर्विस में, बात बन जाएगी। आखिर सरकारी नौकरी की बात कुछ और ही होती है। बिटिया का भविष्य सुरक्षित हो जाएगा।" हजारी जी ने अपने बहुमूल्य सलाह से अवगत कराया। कुछ दिन बाद ही बेनीवाल जी का फौजी लड़का छुटियों में घर आया तो उन्होंने बेटी की शादी की बात छेड़ दी।  "बेटा, हम कह रहे थे कि बड़े वाले दामाद जी सरकारी नौकरी में हैं, सुमन के लिए भी कोई सर्विस वाला लड़का मिल जाता तो अच्छा होता। तुम्हारे नजर में कोई ऐसा लड़का है?" "अरे बाबूजी, कहाँ सरकारी के चक्कर में पड़े हैं। कई लाख देने होंगे। इतने में कई काम हो जाएँगे।" "लेकिन बेटा

Dushmani ki chahat aur dosti se tum parhez rakhte ho.

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  दुश्मनी की चाहत और दोस्ती से तुम परहेज़ रखते हो, मेरे लिए काँटे और अपने लिए फूलों की सेज रखते हो, तुम्हारी ख़्वाहिश कि मैं ख़ाक हो जाऊँ दर्द-ए-तन्हाई में, शायद इसलिए तुम चराग़-ए-नफ़रत बड़ी तेज़ रखते हो। Dushmani ki chahat aur dosti se tum parhez rakhte ho, Mere liye kaanten aur apne liye phoolon ki sej rakhte ho, Tumhari khwahish ki main khaak ho jaun dard-e-tanhai mein, Shayad isliye tum charag-e-nafrat badi tez rakhte ho. मेरे आँसुओं के खरीदार तो बहुत मिले पर क़ीमत कोई लगा ना सका, मैं बोली लगा रहा था अपने जज्बातों की, पर वो बेग़ैरत बाज़ार आ ना सका, दावत-ए-सुख़न मिला था मुझे उसके सालगिरह की, वो अपने यार के साथ पहली सफ़ में थे, मैं गीत कोई गा ना सका। Mere aansuon ke khareedar toh bahut mile par keemat koi lagaa naa saka, Main boli laga raha tha apne jajbaaton ki par wo begairat bazaar aa naa saka, Dawat-e-sukhan mila tha mujhe uske saalgirah ki, Wo apne yaar ke saath pahli saf mein the, main geet koi gaa naa saka. ©नीतिश तिवारी। वीडियो भी देखिए:

Ishq phir se dubaara kar liya.

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  Photo credit: Unspoken voice. लब खामोश हैं, दिल पर भी दस्तक ना हुआ, हीर-राँझा वाला प्यार मुझे अब तक ना हुआ, कोई आए और मुझे घायल करे अपनी अदाओं से, बरसों बीत गए पर कभी ऐसा हरकत ना हुआ। Lab khamosh hain, dil par bhi dastak na hua, Heer- ranjha wala pyar mujhe ab tak naa hua, Koi aaye aur mujhe ghayal kare apni adaon se, Barson beet gaye par kabhi aisa harkat na hua. मेरी मोहब्बत से उसने किनारा कर लिया, मेरे बिना कैसे उसने अपना गुजारा कर लिया, कल देखा मैंने उसे अपने रक़ीब की गली में, लगता है उसने इश्क़ फिर से दुबारा कर लिया। Meri mohabbat se usne kinara kar liya, Mere bina kaise usne apna gujara kar liya, Kal dekha maine use apne raqeeb ki gali mein, Lagta hai usne ishq phir se dubaara kar liya. आँधी भी है, बारिश भी है और मोहब्बत भी, लफ्ज़ भी हैं, लहज़ा भी है और कड़वाहट भी, कशमकश में है मंज़िल, रास्ता कैसे ढूँढ लूँ, सजा भी है, साजिश भी है और शोहरत भी। Aandhi bhi hai, barish bhi hai aur mohbbat bhi, Lafz bhi hain, lahza bhi hai aur kadwahat bhi, Kashmkash mein hai manzil, raasta kaise dhoond

Two line romantic mohabbat shayari || दो लाइन की रोमांटिक मोहब्बत शायरी।

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Pic credit: unsplash.   Two line romantic mohabbat shayari. दो लाइन की रोमांटिक मोहब्बत शायरी। तेरा यूँ मुस्कुरा कर देखना हमें अच्छा लगता है, तुम जब साथ होती हो तो प्यार सच्चा लगता है। Tera yu muskura kar dekhna humen achcha lagta hai, Tum jab saath hoti ho to pyar sachcha lagta hai. कागज़ों पर उतर गए हैं जज़्बात हमारे, तुमसे मिलकर अच्छे हुए हालात हमारे। Kagazon par utar gaye hain jazbaat humare, Tumse milkar achche huye halaat humare. ख़्वाबों में दीदार हुआ था, हक़ीक़त में तुम समाई हो, ऐसा लगता है कि तुम परियों के शहर से आई हो। Khwabon mein deedar hua tha, haqeeqat mein tum samayi ho, Aisa lagta hai ki tum pariyon ke shahar se aayi ho. एक ख़त लिखा और लिफ़ाफे में बंद करके भेज दिया, अपने दिल के जज़्बात मैंने उस ख़त में सहेज दिया। Ek khat likha aur lifafe mein band karke bhej diya, Apne dil ke jazbaat maine us khat mein sahej diya. तारीफ़ कैसे करूँ जो खुद चाँद की मूरत है, चाँद भी अब पूछ रहा, कैसी तेरी चाँद की सूरत है। Tareef kaise karun jo khud chand ki murat hai, Chand bhi ab pooch raha, kai

Book review- Ibnebatuti by Divya Prakash Dubey.

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  फ़ोटो: लेखक महोदय के फेसबुक से। "पूरी दुनिया में एक भी डॉक्टर ऐसा नहीं है जो दवा के साथ दिन में दो बार प्रेमपत्र लिखने के लिए कहे।  सब बीमारियाँ केवल दवा से कहाँ ठीक होती हैं!" ऊपर लिखी हुई ये पंक्तियाँ, दिव्य प्रकाश दुबे जी की किताब इब्नेबतूती से हैं। इन्होंने चार और किताबें लिखी हैं और इब्नेबतूती इनकी पाँचवीं किताब है। आप सोंच रहे होंगे कि मैं किताब का review क्यों लिख रहा हूँ? तो बात ऐसी ही कि जब अल्लू- गल्लू लोग किसी भी फ़िल्म का review कर सकते हैं तो मैं तो साहित्यकार हूँ। (अभी कोई मानता नहीं है इसलिए खुद ही उपाधि दे रहा हूँ), मैं तो किताब के बारे में लिख ही सकता हूँ। अब दूसरा प्रश्न ये है कि क्या ये Sponsored post है? उत्तर है- बिल्कुल नहीं। दुबे सर ने इसके लिए एक रुपया भी नहीं दिया है और ना ही प्रकाशक Hind Yugm ने ये review लिखने के लिए कहा है।  दुबे सर ने अगर कुछ दिया है तो अपनी बहुमूल्य सलाह, आशीर्वाद और बेहतरीन साहित्य। हिन्दी को हिंदी भाषी ( बाकी भाषा वालों से तो तब उम्मीद करेंगे जब अपने हिंदी वाले ही हिंदी को पढ़ लें।) तक  पहुँचाने के लिए बस यही प्रेरणा काफी है। इब