Thursday, July 9, 2020

कभी तन हारा कभी मन हारा।


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कभी तन हारा
कभी मन हारा
एक प्रेम प्रतिज्ञा
के ख़ातिर
सौंदर्य का सुमन हारा।

प्रेम के बिछोह से
कौन यहाँ जीत 
पाया है
आँसुओं की धार
में सब कुछ बह
जाया है।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, July 5, 2020

सोलह सोमवार किया है तेरे लिए।


सोलह सोमवार किया है तेरे लिए
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साजो श्रृंगार किया है तेरे लिए,
दिल अपना हार दिया है तेरे लिए,
अब देर ना करो आ जाओ साजन,
सोलह सोमवार किया है तेरे लिए।

Sajo shringaar kiya hai tere liye,
Dil apna haar diya hai tere liye,
Ab der naa karo aa jao sajan,
Solah somwaar kiya hai tere liye.

©नीतिश तिवारी।

Thursday, July 2, 2020

दर्द में लिखता हूँ ग़ज़ल।


Shayari gazal poetry story
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स्याही को अपना बनाया,
शब्दों को हमराही,
तब जाकर निकली है,
अच्छी भली एक शायरी।

काव्य में उपजे भाव को,
सम्मान देता है रचयिता,
तब जाकर बनती है,
सुंदर सी एक कविता।

मोहब्बत में पड़ती है,
जब जब कोई खलल,
बना लेते हैं हम भी,
दर्द भरी एक ग़ज़ल।

सबके पास होता है,
कहने को कुछ जवानी में,
फिर किरदार उभरकर आते हैं,
उस शख्स की कहानी में।

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, June 30, 2020

मैं ज़िद्दी बहुत था।


Appreciation post





थोड़ा रुका,
फिर चल दिया,
मंज़िल वही रही पर,
रास्ता बदल दिया।
कश्मकश में था तुम्हें,
बता दूँ दिल का हाल,
कहीं फिर से ना,
रास्ता भटक जाऊँ,
इसलिए इरादा बदल दिया।
हर मोड़ पर लोगों ने कोशिश की,
मुझे रोकने की,
मैं ज़िद्दी बहुत था, 
बस मंज़िल की ओर चल दिया।

©नीतिश तिवारी।

Monday, June 29, 2020

दावत-ए-इश्क़ की ख़ातिरदारी।


Dawat-e-ishq







दावत-ए-इश्क़ की ख़ातिरदारी करने वाले,
मोहब्बत की रस्म निभाने को कहते हैं,
गैरों की महफ़िल में हमें बुलाकर,
उन्हीं के सामने हमें आज़माते हैं।

Dawat-e-ishq ki khatirdari karne wale,
Mohabbat ki rasm nibhane ko kahte hain,
Gairon ki mehfil mein humen bulakar,
Unhin ke samane humen aazmate hain.

©नीतिश तिवारी।

Monday, June 15, 2020

क्योंकि खुश रहना है जरूरी...


Reason to be happy
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संसार की मोहमाया के आगे व्यर्थ है ये सुंदर काया। तन स्वस्थ रखना जरूरी है पर उससे भी ज्यादा जरूरी मन की शांति है। अपने आस पास कुछ लोग ऐसे होने चाहिए जिससे आप बिना किसी झिझक के अपने दिल की बात कह सकें।

अवसाद कब आपका दामन थाम ले कुछ कहा नहीं जा सकता। इंसानी दिमाग ऐसा है कि जरा सी परेशानी से हम घबरा जाते हैं और धीरे धीरे यही घबराहट डिप्रेशन का रूप ले लेती है। 

ये वक़्त वाकई बहुत कठिन दौर से गुजर रहा है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हम सब खुश रहें और अपने घर परिवार यार दोस्तों का भी ख्याल रखें।
प्रभु सबका कल्याण करें।

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, June 9, 2020

आओ करें फिर प्रेम मिलन।


Romantic couple
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पवित्र समय का
प्रेम मिलन
अपराधबोध कैसे हुआ।

जब दोनों की
सहमति थी फिर
ये अवरोध कैसे हुआ।

क्यों मन तेरा लगता नहीं
मेरा भी कुछ अच्छा नहीं
संदेह दृष्टि है लोगों की
हमने तो कुछ गलत किया नहीं।

जीवन मरण के चक्कर से
मुक्त होना है तुम्हें अगर
आओ करें फिर प्रेम मिलन
कब तक रहोगे दूर सजन।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, June 7, 2020

हमसे किया है हमीं पर आज़माना।


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हमसे किया है
हमीं पर आज़माना
मोहब्बत की बातें
किसी और को ना बताना।

चंदा सूरज सब
नाराज़ हो जाएंगे
जब मैं कहूँ तब ही
अपना घूँघट उठाना।

शर्म हया सब तुम्हारे
ही तो गहने हैं
किसी गैर के सामने
यूँ बेवजह ना आना।

मेरे दिल की धड़कन
अब गवाही देती है
वक़्त रहते तुम
सिर्फ मेरा हो जाना।

©नीतिश तिवारी।

Monday, June 1, 2020

खुद को राजा तुम्हें रानी कहूँगा।


खुद को राजा तुम्हें रानी कहूँगा
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प्रेम में साथ दोगी
तो मैं खुद को राजा
और तुम्हें 
अपनी रानी कहूँगा।

अगर जुदा हो गयी
मुझसे तो खुद को
फ़कीर फिर भी
तुम्हें रानी कहूँगा।

मेरा प्रेम इतना कमजोर
नहीं है कि तुम्हें दी हुई
रानी की उपाधि
तुमसे छीन लूँ।

Prem mein saath dogi
Toh main khud ko raja
Aur tumhen
Apni rani kahunga.

Agar juda ho gayi
Mujhse toh khud ko
Fakir phir bhi
Tumhen rani kahunga.

Mera prem itna kamjor
Nahi hai ki tumhen di hui
Rani ki upadhi
Tumse chhin loon.

©नीतिश तिवारी।

Friday, May 29, 2020

मशहूर हूँ तेरे दर्द के कारण।


Dard shayari
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नज़रें तुम्हारी, हुस्न तुम्हारा, और हम पर कत्ल का इल्ज़ाम आया,
झुमकों ने तुम्हारी शरारत की, तब जाकर मयख़ाने में
जाम आया।


Nazren tumhari, husn tumhara, aur hum par qatl ka ilzaam aaya,
Jhumkon ne tumhari shararat ki, tab jakar maykhane mein jaam aaya.

मेरे हर शेर से पहले इरशाद करने वाले,
अब आ भी जाओ हमें बर्बाद करने वाले,
मैं मशहूर हूँ आज तो तेरे दर्द के कारण,
मरहम मत लगाओ ज़िन्दगी आबाद करने वाले।

Mere har sher se pahle irshad karne wale,
Ab aa bhi jaao humen barbaad karne wale,
Main mashhoor hoon aaj to tere dard ke karan,
Marham mat lagao zindagi aabad karne wale.

©नीतिश तिवारी।





Monday, May 25, 2020

इफ्तारी में जाकर तुमने चाँद बदल लिया।


Eid shayari
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बिछड़ गए तुमसे तो क्या, फिर भी हम तुम्हारे रहेंगे,
तमाशा देखने वालों की नज़र में सिर्फ एक नज़ारे रहेंगे,
किसी और की इफ्तारी में जाकर तुमने अपना चाँद बदल लिया,
ईद पर मिलना हमसे, तुम्हारे ही चाँद के बगल में एक सितारे रहेंगे।

Bichhad gaye tumse toh kya, phir bhi hum tumhare rahenge,
Tamasha dekhne walon ki nazar mein sirf ek nazare rahenge,
Kisi aur ki iftaari mein jakar tumne apna chand badal liya,
Eid par milna humse, tumhare hi chand ke bagal mein ek sitare rahenge.

©नीतिश तिवारी।

Friday, May 22, 2020

स्त्री के प्रेम का अस्तित्व।


स्त्री के प्रेम का अस्तित्व
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प्रेम की कविताओं
को पढ़ते वक्त तुम
ढूँढ लेते हो श्रृंगार रस 
के दोनों  प्रकार
संयोग श्रृंगार और 
वियोग श्रृंगार।

बस नहीं ढूँढ पाते तो 
उस प्रेम का अस्तित्व 
जो एक स्त्री तुमसे 
करती है निःस्वार्थ
ये जाने बिना कि उसे 
संयोग मिलेगा या वियोग।

©नीतिश तिवारी।


Thursday, May 21, 2020

आशिक़ मधुशाला से निकलकर।


City of romance paris
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तुम पेरिस, वेनिस
या फिर ज़्यूरिख
चले जाओ।

तुमने हमारे पवित्र
प्रेम पर जो
प्रतिघात किया है
उसकी प्रतिध्वनि
तुम्हें हर जगह
सुनाई देगी।

आशिक़ कभी कभी
मधुशाला से निकलकर
खूबसूरत शहरों में भी
विचरण करते हैं।

©नीतिश तिवारी।

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Monday, May 18, 2020

मजदूर- अपने घर से दूर, वापस लौटने पर क्यों हैं मजबूर?


मजदूर lockdown
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ये ऊपर जो तस्वीर आप देख रहे हैं ये यहाँ लगाने का मन तो नहीं था लेकिन यही आज का सच है।

Lockdown 4 की घोषणा हो चुकी है। कुछ दिन और यानी की 31 मई 2020 तक हमें और आपको अपने घरों के अंदर रहना पड़ेगा। हो सकता है कि 31 मई तक आप लूडो के चार गेम और जीत जाएँ। चार नए पकवान बनाना सीख जाएँ या फिर चार नए वेब सीरीज देखकर खत्म कर दें। 

कोरोना जैसी भयंकर महामारी से उत्पन्न हुई परिस्थिति में कुछ लोग घर बैठे बैठे ऊब जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ हमारे मजदूर भाई बहन अपने घर पहुँचने की राह में ही मौत के मुँह में डूब जा रहे हैं। ये बहुत ही अकल्पनीय और हृदयविदारक परिस्थिति है जिसमें मौत कैसे आएगी उसमें भी गरीबी और अमीरी का भेदभाव है। 

इससे बड़ी विडम्बना क्या होगी कि अमीरों द्वारा हवाई जहाज़ में लायी गयी मौत, गरीबों के हिस्से रेल की पटरियों पर आई। उन्हीं रेल की पटरियों पर मजदूरों के खून से सनी हुई रोटियाँ हमारे निरंकुश सत्ता में बैठे हुए मठाधीशों को दिखाई नहीं देती। वोट बैंक की राजनीति  के अवसरवादी तराजू में लोगों को तौलने वाले मोतियाबिंद से पीड़ित नेताओं के चश्में पर सत्ता की ऐसी धूल जमी हुई है कि उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा।

अगर दिखाई दे रहा होता तो एक माँ, ट्रॉली बैग पर सोये हुए बच्चे को खींच कर नहीं ले जा रही होती।
लोकतांत्रिक व्यवस्था की अगर परवाह होती और मोतियाबिंद का चश्मा उतर गया होता तो एक पत्नी अपने पति के अंतिम संस्कार में गाँव जाने के लिए नहीं तड़प रही होती। एक आदमी अपने पूरे परिवार को बैलगाड़ी से खुद एक बैल बने हुए नहीं खींच रहा होता। 



सवाल तो पूछे जाएँगे और जवाब भी देने पड़ेंगे। उन सभी सत्ता के ठेकेदारों से जिनकी जिम्मेदारी थी कि इस संकट की घड़ी में मजदूरों को उनके खाने का इंतजाम किया जाय। अगर दो वक्त की रोटी का इंतज़ाम कर दिया गया होता तो शायद मजदूर अपने गाँव की ओर नहीं जाते। पर क्या करोगे साहब, मजदूर हैं इसलिए पैदल चलने पर मजबूर हैं, NRI होते तो हवाई जहाज़ से लाये जाते। 

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धन्यवाद!

©नीतिश तिवारी।


Sunday, May 17, 2020

तुम अपने प्रेम से मुझे मुक्त होने को कहते हो?



Love romantic poem
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तुम अपने प्रेम से 
मुझे मुक्त होने को 
कहते हो?

तो कह दो उस
आसमाँ से कि
अपनी बारिश की
बूँदों को धरती से
वापस ले जाए।

तो कह दो समंदर
से मिलकर पूरी
हुई नदी से कि
वो अपनी धार को
समंदर से खींचकर
फिर से आधी हो जाए।

तुम अपने प्रेम से 
मुझे मुक्त होने को 
कहते हो?

तो कह दो राजा
के महल में जल
रहे दीये की लौ
को कि वो जलना
बंद कर दे
जिससे की ठंडी
रात में तालाब में
इनाम की चाह में
पड़ा ब्राम्हण ठिठुर
कर मर जाए।

अगर ये सब कहने की
तुम्हारी चेष्ठा नहीं है तो
बस एक बात सुन लो

दो आत्माओं के मिलन
से प्रेम परिपूर्ण होता है
एक दूसरे से मुक्त होने 
से आत्माएँ भटकती
रहती हैं
और इस जन्म में
मैं तुम पर भूत का
इल्ज़ाम नहीं आने
देना चाहता।

©नीतिश तिवारी।