Sunday, 15 September 2019

Arrested in love.


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उसकी आहट है और उसका दीदार होगा,
वो जो आनेवाला है वो मेरा प्यार होगा,
तमाशें देखने का शौक है तो रुक जाओ,
अभी ये आशिक़ इश्क़ में गिरफ्तार होगा.

uski aahat hai aur uska deedar hoga,
wo jo anewala hai wo mera pyar hoga,
tamashen dekhne ka shauk hai toh ruk jao,
abhi ye ashiq ishq mein giraftar hoga.

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 10 September 2019

पतंग और इश्क़।

























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सच्चाई की दुहाई खुद्दारी के कसीदों से देते हो,

पुरानी मोहब्बत को तुम झूठी उम्मीदों से ढोते हो,
इश्क़ के पतंग की डोर तो कब की टूट चुकी है,
फिर भी उसके नाम की कॉफ़ी हर रोज पीते हो।

Sachhai ki duhai khuddari ke karodon se dete ho,

Purani mohabbat ko tum jhuthi umeedon se dhote ho,
Ishq ke patang ki dor to kab ki toot chuki hai,
Fir bhi uske naam ki coffee har roj peete ho.

©नीतिश तिवारी।

Monday, 9 September 2019

समंदर वाली मोहब्बत।

















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लहरों को किनारे
से देखते हुए
जब उसमें डूबने
का मन करे
तो उन आँधियों
के बीच
तूफानों को
चीरते हुए
आ जाना
मेरी बाहों में
मैं जी भरके
प्यार करूँगा
और किनारों
का एहसास
नहीं होने दूँगा।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 8 September 2019

इश्क़ में बदनामी।


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अभी परिंदों को मत उड़ाओ,
इन्हें तो बस गुलामी पसंद है,
वो इश्क़ करने से नहीं डरता,
उसे तो बस बदनामी पसंद है।

Abhi parindon ko mat udao,
Inhen to pas gulami pasand hai,
Wo ishq karne se nahin darta,
Use to bas badnaami pasand hai.

मैं हैरान हूँ, मैं परेशान हूँ और मैं हूँ खफा,
तुम पास आ जाओ, मेरे दर्द की मिलेगी दवा,

Main hairaan hoon, main pareshan hoon aur main hoon khafa,
Tum paas aa jao, mere dard ki milegi dawa.


©नीतिश तिवारी।

Friday, 6 September 2019

My first book- फिर तेरी याद आई।
























पिछले 6 वर्षों से अधिक समय तक ब्लॉग पर लिखते हुए
कभी ख्याल ही नहीं आया कि एक किताब भी लिखूँ। इस किताब में मैंने अपनी चुनिंदा शायरी, ग़ज़ल, कविता और लघुकथा को संग्रहित करने का प्रयास किया है। लेखन क्षेत्र में उत्साह बढ़ाने वाले मित्रों का शुक्रिया। 

मैं आभार व्यक्त करता हूँ उन लोगों का भी जो मेरे ब्लॉग को निरंतर पढ़ते आये हैं।  अभी के लिए बस इतना ही, बाकी एक फिक्शन उपन्यास लिख रहा हूँ। उसके लिए आपका आशीर्वाद चाहूँगा।

बड़े हर्ष के साथ सूचित कर रहा हूँ कि मेरी पहली पुस्तक अमेज़न पर उपलब्ध है। आप यहाँ से खरीदकर पड़ सकते हैं। पढ़ने के बाद review जरूर पोस्ट करें। धन्यवाद।

©नीतिश  तिवारी।

Wednesday, 4 September 2019

रूप बड़ा या गुण।

























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रूप बड़ा या गुण
अक्सर ये सवाल
भ्रम पैदा करता है

पर तुझे देखने
के बाद
तुझसे मिलने
के बाद

मैं भ्रम में
नहीं रहता
दोनों तो हैं
तुम्हारे पास

रूप ऐसा कि
चाँदनी बिखेरे है
गुण ऐसा कि
हीरे की तारीफ़
कम पड़ जाए

©नीतिश तिवारी।

Monday, 2 September 2019

हरितालिका तीज की शुभकामनाएं।






















आज गणेश चतुर्थी के साथ साथ हरितालिका तीज भी है। तीज का त्योहार  सुहागिन महिलाएं अपने पति की खुशी और लंबी उम्र के लिए रखती हैं। 24 घंटे तक बिना पानी के और खाना के ये व्रत रखा जाता है। 

वैसे तो श्रीमती जी की ये दूसरी तीज है लेकिन मेरे साथ पहली । पिछले वर्ष हम लोग साथ नहीं थे। वैवाहिक जीवन में कदम रखने के बाद तीज त्यौहार का महत्व धीरे धीरे समझ आने लगा है। 


कुछ पंक्तियाँ।


तीज का त्यौहार आया, 

खुशियों की बहार लाया,
पिया का साथ मिला है,
दिलों में खुमार आया।

सपनों की सौगात मिली,

आपनो का साथ मिला,
दो पल की ज़िंदगी में,
ढेर सारा प्यार मिला।

©नीतिश तिवारी।



Sunday, 25 August 2019

Main raat kaise guzarun.

























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मैं बदन को सवारूँ या अपने नसीब को सवारूँ,
तुझे दिल में बसा लूँ या अपने दिल से उतारूँ,
ख़्वाबों की ताबीर ऐसी हुई कि नींद टूटी चुकी है,
तू ही बता ओ ज़ालिम अब ये रात मैं कैसे गुजारूँ।

Main badan ko sanwarun ya apne naseeb ko sanwarun,
Tujhe dil mein basa lun ya apne dil se utarun,
Khwabon ki tabeer aisi huyi ki neend tut chuki hai,
Tu hi bata oo zalim ab ye raat main kaise guzarun.

©नीतिश तिवारी।





Saturday, 24 August 2019

Hindi Shayari- Parwane huye hain


















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दीवानों की बस्ती में मस्ताने हुए हैं हम,
शम्मा के इंतजार में परवाने हुए हैं हम,
यूँ तो यहाँ हर शख्स की मौजूदगी है,
अपनों की महफ़िल में बेगाने हुए हैं हम।

Deewanon ki basti mein mastane huye hain hum,
Shamma ke intzaar mein parwane huye hain hum,
Yun to yahan har shaks ki maujoodagi hai,
Apnon ki mahfil mein begane huye hain hum.

©नीतिश तिवारी।



Friday, 23 August 2019

तू राधा मेरी, मैं तेरा कान्हा।
























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आज कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर एक कविता 


तू मेरे लिए 16108 रानियों के बराबर है,
और मेरा दिल तुझे राधा की भाँति अपनाता है,
तू मेरे लिय इतना खास है, 
जैसे सावन का पहला एहसास है।

जो मेरे सीने में धड़क रही है,
उसकी तू कमजोरी है, 
मैं द्वापर का कृष्ण तो नहीं मगर,
फिर भी अपनी कहानी अभी तक अधूरी है।

मेरी तरफ से तो बातें पूरी है,
पर तेरी भी कुछ मजबूरी है,
तेरी बस एक मुस्कान ने
फेरी दुनिया मेरी है।

तू राधा रुक्मिणी जिस भी रूप में,
आजा तुझे स्वीकारने में,
ये दिल करता नहीं देरी है,
तू मेरी तरफ से पूरी की पूरी मेरी है।

मेरी धड़कनो पर राज तेरा ही है,
फिर किस बात की देरी है,
तू ही मेरी दुनिया है या,
तुझसे मेरी दुनिया है,
इसी द्वंद में फसी कहानी मेरी है।

©शांडिल्य मनिष तिवारी।

Thursday, 22 August 2019

ऐ दोस्त...

























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ऐ दोस्त काश तुम गद्दार न होते 
तो मेरे दिल के तार तार न होते 
काश तुमने दोस्ती निभाना सीखा होता 
तो मैं भी खुशी के दो पल जिया होता 
काश तुमने मेरे भरोसे का लाज रखा होता 
मेरे दिल से की गयी बातों का
अपने दिमाग द्वारा उपयोग न किया होता 
काश तुमने अपना दोहरा चरित्र 
पहले ही दिखा दिया होता 
तो मैं भी चैन से सोया होता
काश तुमने कृष्ण-सुदामा परम्परा को कायम रखा होता
तो आज भी मैं तुम पर अपना सर्वस्व न्यौछावर कर रहा होता 
जो बातें तुझे रास न आईं मुझे एक बार बता कर तो देखा होता 
ऐ दोस्त ...

© शांडिल्य मनीष तिवारी।

Wednesday, 21 August 2019

चाँद को बुला रहे हो!








चिराग जलाने जा रहे हो,
हवा को भी ले जा रहे हो।

बिखरकर टूट चुके हो तुम
फिर भी मुस्कुरा रहे हो।

इश्क़ में इतने पागल हो तुम,
दिन में चाँद को बुला रहे हो ।

तूफानों से तो डर लगता था,
दरिया में नाव चला रहे हो।

इश्क़ को मुकम्मल नहीं होना,
फिर भी उसे आजमा रहे हो।

©नीतिश तिवारी।

Monday, 19 August 2019

English poem - Questions and Answers.



















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One question has may answers
You want your answer
He wants his answer
I want my answer
That's the problem
We couldn't find exact answer

I wonder why this happens 
People want happiness
But only their happiness
Never bother for others
Problem lies in this 
And we couldn't find happiness

Life is easy
But people make
it complicated
Then they complain
I wonder why
Why this happens
People want answers
But couldn't find answers

©Nitish Tiwary.

Saturday, 17 August 2019

तुझे लगता है..

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तुझे लगता है...

तुझे लगता है कि 
मैं तेरे बगैर नहीं
रह सकता तो 
भ्रम में हो तुम

तन्हाई की दीवार
जो तूने खड़ी की है
उसमें एक खिड़की 
बना ली है मैंने

तुम्हारे दर्द को
भुलाने के लिए
किताबों से
मोहब्बत कर 
बैठा हूँ

नए कहानियों के
साथ समय बिताता हूँ
तुमसे अच्छे 
किरदार हैं इनमें
जो दर्द नहीं
खुशियां देते हैं।

©नीतिश तिवारी।


Thursday, 15 August 2019

Happy Independence Day India.

















Happy Independence Day.

वीर शहीदों के बलिदान से आज़ादी हमने पायी है,
कुछ बैठे रहे घरों में कुछ ने सरहद पर जान गँवायी है,
अपने लहू से सींचकर  देश को आज़ादी दिलायी है,
वतन के आगे नतमस्तक होकर विजय हमने पायी है।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 7 August 2019

कविता- ज़िंदगी का फलसफा।

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कोई मुश्किल में जीता है,
कोई आसान समझता है।

ये जिंदगी का फलसफा है,
ये हर कोई समझता है।

फूलों और काँटों की जंग है,
अंदर ही अंदर एक द्वन्द्व है।

रोते नहीं हँसकर जीते हैं,
तभी तो जिंदगी में उमंग है।

©नीतिश तिवारी।
Twitter: @nitishpoet

Thursday, 1 August 2019

कलयुग का आरम्भ क्यों हुआ?








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कलयुग का आरम्भ क्यों हुआ?

सनातन धर्म के शास्त्रों के मुताबिक कलयुग चौथा और आखिरी युग है। अभी कलयुग का प्रथम चरण चल रहा है। इसका मतलब ये हुआ कि अभी कई वर्षों तक कलयुग का काल क्रम जारी रहेगा और आखिरी में दुनिया खत्म हो जाएगी। वैसे दुनिया तो 2012 में ही खत्म होने वाली थी लेकिन यहाँ मौजूद लोगों के अच्छे कर्म और गुणवान चरित्र को देखते हुए भगवान ने कुछ वर्षों का एक्सटेंशन दे दिया। या यूँ कहिए कि सशर्त पेरोल दे दिया कि बेटा ठीक से रहो नहीं तो सबको अपने पास बुला लेंगे। 

लेकिन इस पोस्ट में मेरा मकसद आप सभी को कलयुग के निर्माण के पीछे के सत्य से रूबरू कराने का है। द्वापर युग के कालखंड की घटनाओं को आधार बनाकर भगवान ने कलयुग का निर्माण किया। मनुष्य को सबसे ज्यादा बुद्धिमान प्राणी का दर्जा दिया गया। वो बात अलग है कि यही मनुष्य समय समय पर अपनी बुद्धि खो देता है और फिर भगवान को ही दोष देने लगता है।  तो आइये कलयुग निर्माण के पीछे के रहस्य को जानते हैं और कुछ बिंदुओं पर विचार करते हैं।

# कलयुग का निर्माण शायद इसलिए हुआ होगा क्योंकि जब तक time machine की खोज नहीं हो जाती तब तक FaceApp के जरिए मनुष्य भविष्य में जाने की डिजिटल कोशिश करता रहेगा। ये बात सिर्फ पुरुषों पर लागू होती है क्योंकि कोई महिला बूढ़ी दिखना नहीं चाहती । इसी का परिणाम है कि किसी भी महिला को आपने FaceApp का प्रयोग करते हुए नहीं देखा होगा। 

# महाभारत में द्रौपदी का चीरहरण तो सिर्फ एक बार हुआ था, वो भी भरी सभा में। इसके विपरीत कलयुग में हमारी माताओं और बहनों की अस्मिता से रोज खिलवाड़ हो रहा है। दोनों काल में समानता बस इतनी है कि तब भी आरोपी (दुशासन) रसूखदार था और आज के भी आरोपी (विधायक सेंगर और न जाने कितने और) रसूखदार हैं। शायद कलयुग का निर्माण यही दिन देखने के लिए हुआ होगा।

# चाँद और मंगल पर हम पहुँच चुके हैं लेकिन अभी भी 21वीं शताब्दी में मृत शरीर को ले जाने के लिए Ambulance तक उपलब्ध  नहीं हो पाता है। उड़ीसा की कई घटनाएँ इसकी गवाह हैं। भगवान भी ये देखकर सोंच रहे होंगे कि द्वापरयुग के बाद ही दुनिया को खत्म क्यों नहीं कर दिया गया।

# सैकड़ों बच्चे अचानक ऐसी बीमारी से मर जाते हैं जिसको ठीक से पता नहीं लगाया जा सकता। इलाज और दवाई की बात तो छोड़ दीजिए। जवाबदेही माँगने गए TRP वाली धुरंधर पत्रकारिता को सार्थक करने वाले पत्रकार , डॉक्टर के मुँह में माइक ठूँसकर ICU को अपने चैनल का स्टूडियो समझ लेते हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि सरकार के पास जाकर सवाल करने की उनकी हिम्मत नहीं है।

# गरीब के पास पहनने के लिए ढंग के कपड़े नहीं है और अमीर लोग ( कुछ तो जबरजस्ती अमीर दिखने की कोशिश करते हैं भले ही शक्ल बिल्कुल भिखारी वाला हो) तथाकथित फैशन वाले फटी जीन्स पहनने पर गौरवान्वित महसूस करते हैं। शायद इसलिए ये घोर कलयुग है।

# कलयुग का निर्माण शायद इसलिए भी हुआ होगा कि धर्म, सम्प्रदाय, जाती और क्षेत्र के आधार पर दो लोगों को बाँट दिया जाए और तीसरा मौज ले।

#  पहले एक कहावत थी- "आप रूप भोजन, पर रूप  श्रृंगार।"  मतलब भोजन अपनी पसंद से करना चाहिए और श्रृंगार दूसरे की पसंद से। आजकल बिल्कुल उल्टा हो रहा है। यही तो असली कलयुग है।

# कलयुग का निर्माण इसलिए भी हुआ होगा कि संख्या 6 को 6 कहने वाले लोग कम रहेंगे। कुछ कहेंगे कि 6 पांच से बड़ा है, कोई कहेगा कि 6, सात से छोटा है। और अगर बहुत ज्यादा पढ़े लिखे विद्वान से आप पूछेंगे तो कहेगा कि 2 और 3 के गुना करने से 6 आता है। 

# राजा को प्रजा की बिल्कुल भी चिंता नहीं होगी। अगर होगी भी तो mutual fund वाले विज्ञापन के आखिरी लाइन की तरह होगी। "बीमा आग्रह की विषय वस्तु है, खरीदने से पहले नियम व शर्तें जाँच लें।" ये कलयुग निर्माण का सबसे शुद्ध कारण है।

# कलयुग का निर्माण इसलिए भी हुआ होगा कि देश की सेना के शौर्य पर कुछ चिरकुट नेताओं द्वारा शक किया जाए। शायद महाभारत में अभिमन्यु इसलिए वीरगति को प्राप्त हो गए थे क्योंकि चक्रव्यूह भेदने के बाद वो अरविंद केजरीवाल के लिए सबूत इकट्ठा कर रहे थे।

# कलयुग का निर्माण इसलिए भी हुआ होगा कि हजारों लाखों प्रतिभावान युवा अपने अधिकार से सिर्फ इसलिए वंचित रह जाते हैं क्योंकि उन्हें उन्हीं के देश के हुक्मरानो ने जातिगत आरक्षण का अभिशाप दिया हुआ है। 

बाकी कहने को तो बहुत कुछ है पर लिखेंगे फिर कभी अगले पोस्ट में । तब तक साथ बनाए रखिए। 
पोस्ट पसंद आयी हो तो शेयर जरूर कीजियेगा।
धन्यवाद।

ये भी पढिए: रवीश कुमार ने अपने एक Fan को थप्पड़ मारा।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 31 July 2019

ये मौसम और प्यार।
























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तुमने कुछ नहीं कहा, ये बरसात भी थम गई। तुम्हारे जाने के बाद अक्सर सोंचता हूँ कि प्यार का मौसम कौन सा था। प्यार मौजूद भी था या बेमौसम बारिश की तरह आया और चला गया। कितनी कहानियों के किरदार सजा कर रखे थे मैंने। पर तुम्हारे जाने के बाद सारे किरदार दम तोड़ने लगे हैं। किताबों पर धूल पड़ गयी है, बगीचों में फूल खत्म हो गए हैं। पर जाते जाते एक वादा करके जाओ। वादा ये की तुम आओगी फिर से। उन्हीं कहानियों के किरदार को ज़िंदा करने के लिए। मुझे ज़िंदा करने के लिए।

©नीतिश तिवारी।

पंक्तियाँ अच्छी लगी हों तो शेयर जरूर कीजिए। धन्यवाद।

Monday, 29 July 2019

Shayari aur tera pyar.

























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शायरी में दर्द लिखूँ, ग़ज़ल में कयामत और कहानी में तेरा किरदार,
बहुत फरमाइश आ रही है, लो ज़िक्र कर ही देता हूँ, तेरा प्यार।

Shayari mein dard likhoon, gazal mein qayamat aur kahani mein tera kirdaar,
Bahut farmaish aa rahi hai, lo zikar kar hi deta hoon, tera pyar.

फूलों से दोस्ती, बगिया से प्यार, लहरों से इश्क़ , समंदर को सलाम, वो भी एक मौसम था।
काँटों से दोस्ती, पतझड़ से प्यार, सूखे से इश्क़, बंजर को सलाम, ये भी एक मौसम है।

Foolon se dosti, bagiya se pyar, lahron se ishq, samandar ko salaam, wo bhi ek mausam tha.
Kaanton se dosti, patjhad se pyar, sookhe se ishq, banjar ko salam, ye bhi ek mausam hai.

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 28 July 2019

तन्हाई का इनाम।

















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वस्ल से पहले क्यों हिज़्र का फ़रमान दे दिया,
मुझको विदा किया और रास्ते का सामान दे दिया,
तुम तो कहते थे कि कीमती है हमारी मोहब्बत,
फिर वक़्त से पहले क्यों तन्हाई का इनाम दे दिया।

Wasl se pahle kyun hizr ka farmaan de diya,
Mujhko vida kiya aur raste ka saaman de diya,
Tum toh kahte the ki kimti hai humari mohabbat,
Fir waqt se pahle kyun tanhai ka inaam de diya.

नीतिश तिवारी।







Friday, 26 July 2019

चंद्रयान और तेरी मोहब्बत।


























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चंद्रयान और तेरी मोहब्बत।

चंद्रयान लॉन्च
हो गया है
तुम भी साथ गयी
हो क्या
नहीं मैं इसलिए
पूछ रहा हूँ
क्योंकि अभी तो
चंद्रयान पृथ्वी 
की पहली 
कक्षा में ही
स्थापित हुआ है
और अभी से ही
उस पर तेरा नाम
देख रहा हूँ
अच्छा तो तुम 
यहीं हो
लगता है तुमने
मेरे नाम की
मेंहदी लगाई है।

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 23 July 2019

ग़ज़ल- चरागों का एहतराम किया।

























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दिवाली थी तो चरागों का एहतराम किया,
दिल अपने जलाए और तेरे नाम किया।

खुदगर्ज़ी का शौक तो तुमने पाला था,
हमने तो अपना वक़्त भी तेरे नाम किया।

साँस लेने में हमें अब तकलीफ़ होती है,
जब से इन हवाओं को तेरा गुलाम किया।

दर्द देने की फितरत से तू बाज ना आया,
इसलिए हमने मोहब्बत सरेआम किया।

अंज़ाम-ए-वफ़ा क्या होता इस कहानी का,
खंज़र ले आया और मौत का इंतज़ाम किया।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 21 July 2019

Reason behind selective propaganda to defame the Narendra Modi government.
























Reason behind selective propaganda to defame the Narendra Modi government.

जी हाँ दोस्तों, आज मैं बात करूँगा नरेंद्र मोदी सरकार को बदनाम करने वाली साजिश के बारे में। वही साजिश जो 2014 से चली आ रही है इस तर्क के साथ कि पहले भारत में लोकतंत्र भलीभांति फल फूल रहा था। लेकिन 2014 के बाद लोकतंत्र खतरे में आ गया।

पिछले कुछ वर्षों में हिंदुस्तान में एक नया ट्रेंड शुरू हो गया है। इस ट्रेंड को शुरू करने वाले हैं so called intellectuals. मैं आगे आपको कुछ घटनाएँ बताऊँगा जिससे कि इनका पाखंड उजागर हो जाएगा।

Intolerance के बाद अब एक और नए शब्द का अवतरण हुआ है और उसका नाम है Mob lynching. कहा ये जा रहा कि मुसलमान और दलित इस देश में सुरक्षित नहीं है। पर ये कोई नहीं बताएगा कि अगर मुसलमान इस देश में सुरक्षित नहीं हैं तो फिर रोहंगिया मुसलमानों को अवैध तरीके से बसाने और शरण देने की पैरवी क्यों की जा रही थी।

कुछ दिनों पहले झारखण्ड की घटना को इतना तूल दिया गया और कहा गया कि तबरेज़ जो एक चोरी करता हुआ पकड़ा गया था, उसे भीड़ ने मार दिया। वो भी जय श्री राम बुलवाकर। वो बात अलग है कि मौत का कारण डॉक्टरों ने कुछ और बताया था। अगर यही तबरेज़ मुसलमान ना होकर कोई और होता तो शायद इतनी चर्चा नहीं होती। इसका प्रूफ ये है कि जब भीड़ ने मथुरा के लस्सी वाले को पैसे मांगने पर मार दिया तब कोई कुछ नहीं बोला। इन so called intellectuals के मुंह में दही जम गया था जब दिल्ली में डॉक्टर नारंग की हत्या हुई। ध्रुव त्यागी के मामले में तो इनको सांप सूंघ गया था। अगर पीड़ित मुसलमान या दलित हो तो इनको दिन में तारे दिखने लगते हैं लेकिन अगर आरोपी मुसलमान हो तो फेविकोल का पूरा स्टॉक खत्म हो जाता है और इनके होंठ सील जाते हैं।




कठुआ में आसिफ़ा के साथ जो हुआ वो बहुत बुरा हुआ। लेकिन चूंकि उसमें आरोपी हिन्दू थे तो पूरे हिन्दू धर्म को बदनाम कर दिया गया। देवी स्थान को बदनाम कर दिया गया। बॉलीवुड की महान आदर्शवादी अभिनेत्रियों ने तो तख्ती पर लिखकर पूरे हिंदुस्तान और हिन्दू धर्म को बदनाम करने की साजिश करने लगीं। लेकिन ट्विंकल शर्मा के केस में इन्ही आदर्शवादी अभिनेत्रियों की तख्ती गायब थी, शायद लिखने के लिए स्याही खत्म हो गया होगा।

जब कश्मीर में लाखों हिंदुओं को भगा दिया जाता है तब लोकतंत्र खतरे में नहीं आता। लोकतंत्र तब भी खतरे में नहीं आता जब दिल्ली में हजारों सिखों का कत्ल कर दिया जाता है। क्योंकि उस समय इनकी मर्जी की सरकार थी। अब देश के जनता की मर्जी की सरकार है तो सबको मिर्ची लग रही है। आज कुछ लोगों ने ये तय कर लिया है कि किस मामले में बोलना है और किसमे नहीं। वो आरोपी और पीड़ित की जात और धर्म देखकर अपना प्रोपेगेंडा चलाते हैं।

लेकिन देश की जनता समझदार है और इन सबको सबक सिखाने में यकीन रखती है। झूठ कितना भी शक्तिशाली हो लेकिन वो सच को कमजोर नहीं कर सकता। हमें अपनी संस्कृति और सभ्यता पर गर्व करना होगा। इन तथाकथित बुद्धिजीवी लोगों को हराने के लिए बस इतना ही काफी है।

जय भारत। जय हिन्द।



© नीतिश तिवारी।
twitter: @nitishpoet



Friday, 19 July 2019

Kahin der na ho jaye.

























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तू जो मुस्कुराए तो मौसम में बहार आ जाए,
बंजर जमीन में भी बरखा की फुहार आ जाए,
मोहब्बत गर है तो फिर इज़हार कर दे,
कहीं देर ना हो जाए और  इतवार आ जाए।

Tu jo muskuraye toh mausam mein bahar aa jaye,
Banjar zameen mein bhi barkha ki gujaar aa jaye,
Mohabbat gar hai toh for izhaar kar de,
Kahin der na ho jaye aur it waar aa jaye.

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 16 July 2019

बेवफ़ाई ने मशहूर कर दिया।

















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मेरे इश्क़ ने तुम्हें जन्नत का हूर कर दिया,
जमाने भर के सामने हमें मजबूर कर दिया,
अफ़साना अंजाम तक ना पहुँचा तो क्या,
तुम्हारी बेवफाई ने मुझे मशहूर कर दिया।

Mere ishq ne tumhen jannat ka hoor kat diya,
Jamane bhar ke samne humen majboor kar diya,
Afsana anzaam tak naa pahuncha to kya,
Tumhari bewfai ne mujhe mashhoor kar diya.

©नीतिश तिवारी।

Saturday, 13 July 2019

कविता- बरसात और मुलाकात ।




















वो आषाढ़ का पहला दिन था 
मगर मैं अज्ञात उनसे मिलने चला 
टिक-टिकी 4:45 की ओर इशारा कर रही थी 
घनघोर घटा उमड़ रहे थे 
मानो उनका भी मिलन महीनों बाद आज ही होने वाला था 
वैसे मैं भी महीनों बाद ही मिलने वाला था
इंतज़ार के लम्हे तन्हाईयों के आगोश में लिपटे मुझसे परिचय कर रहे थे 
टिक - टिकी के गति से तेज धक-धक की बेचैन करने वाली आवाज सुनाई देने लगी जैसे ही दूर से उनकी आहटों का एहसास हुआ 
रोम रोम पुलकित हो उठा
तभी नभ से एक बूंद मेरे बालों को चूमता हुआ ललाट तक आ पहुँचा 
मानो जैसे वहाँ भी मिलन बस होने ही वाला था 
वो मेरे और नज़दीक आ रही थी 
मगर मैं एक ही जगह अपने पाँव को अंगद की भाती जमाये खड़ा था 
मेरे हाथों में जो गुलाब की पंखुड़ियों का समूह था वो सतह को चूमने वाला ही था तभी एक और बूंद मेरे हाथों को अपना एहसास करने में सफल रहा और पंखुड़ियों के समूह को सतह पर बिखरने से रोक दिया 
अब वो मेरे करीब थी और मैं खुशी घबराहट और हिचकिचाहट से अपना परिचय करा रहा था 
तभी उन्होंने मेरे हाथों से पंखुड़ियों का गुच्छा लिया और अचानक से बादल भी टूट पड़े 
वो आषाढ़ का पहला दिन था ।।

ये भी पढ़िए: इश्क़ का ठिकाना।

©शांडिल्य मनीष तिवारी।

Tuesday, 9 July 2019

Zindgi ishq aur tum.


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करते रहे हम उम्र भर ज़िंदगी से शिकवा,
फिर मौत से सामना हुआ और ज़िंदगी रूठ गई।

Karte rahe hum umr bhar zindgi se shikwa,
Fir maut se saamna hua aur zindgi rooth gayi.

सफर में हमसफर मिले और ज़िंदगी सँवर जाए,
ऐसा हसीन सपना मैंने देखा था एक रोज।

Safar mein humsafar mile aur zindgi sanwar jaye,
Aisa haseen sapna maine dekha tha ek roj.

©नीतिश तिवारी।





Sunday, 7 July 2019

लघुकथा- ट्रेन का सफर।

















लघुकथा- ट्रेन का सफर।

ट्रेन खुले हुए दो घंटे बीत चुके थे। अभी रात भर का सफर बाकी था। वो सामने वाली सीट पर पिछले दो घंटे से बैठकर किताब पढ़ रही थी। कभी कभी हमारी नजरें मिल जाती थी। जब आप एक लेखक हों और आपके सामने कोई किताब पढ़ रही हो तो बात करने की उत्सुकता तो हो ही जाती है। 

हिम्मत करके मैंने पूछ ही लिया, " बड़े ध्यान से आप घंटों से ये किताब पढ़ रही हैं। किस बारे में है ये किताब?"
पहले तो उसने हैरानी से मुझे देखा। फिर जवाब दिया, "कुछ खास नहीं लेकिन आप क्यों पूछ रहे हैं?"
मैंने कहा," मैं भी एक लेखक हूँ और अपनी पहली नॉवेल लिख रहा हूँ।"
फिर उसने मुझे बधाई दी। 

अगले कुछ घंटों में हमलोग काफी घुल मिल गए थे। डिनर भी हमने साथ में किया। चूंकि उसे पहले उतरना था इसलिए मुझे सोने से पहले आगे की बात करनी थी। मैंने कहा, "आपने अपना नाम नहीं बताया अभी तक।"
उसने कहा, "मैं सिमरन और आप?"
"जी, मैं राज।"
वो थोड़ी देर के लिए खामोश हो गयी। शायद DDLJ का सीन याद कर रही होगी। 
अगले ही पल उसकी खामोशी को तोड़ते हुए मैंने कहा,"आपने हमारी दोस्ती की किताब में पहला चैप्टर तो लिख दिया। लेकिन हम इस किताब को पूरा करना चाहते हैं।"  वो मेरा इशारा समझ गयी थी। उसने अपनी पर्स से एक पन्ना निकाला उस पर अपना नंबर लिखा और मुझे देते हुए कहा, " ये लीजिये, ये आपको आपकी किताब पूरी करने में मदद करेगा।" इतना कहकर उसने गुड नाईट बोला और सोने के लिए चली गयी।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 3 July 2019

मोहब्बत का हिसाब मिलेगा।

























Pic credit : Pinterest.



खोखले वादे करने का तुम्हें खिताब मिलेगा,
मोहब्बत में सितम जो किए उसका हिसाब मिलेगा,
मेरी तड़प देखकर अब तुम्हें हैरानी हो रही है,
परेशान मत हो, एक दिन इसका भी जवाब मिलेगा।

Khokhle wade karne ka tumhen khitab milega,
Mohabbat mein sitam jo kiye uska hisab milega,
Meri tadap dekhkar ab tumhen hairani ho rahi hai,
Pareshan mat ho, ek din iska bhi jawab milega.

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 30 June 2019

Shayari- Mohabbat ka Dastoor.

























Pic courtesy : Google.





बिछड़ना मिलना मिलकर बिछड़ना,
तुम्हें खोकर भी तेरा हो जाना,
मोहब्बत का दस्तूर ही कुछ ऐसा है,
गलतफहमी को भी सच मान लेना।

Bichhadna milna milkar bichhadna,
Tumhen khokar bhi tera ho jana,
Mohabbat ka dastoor hi kuch aisa hai,
Galatfahmi ko bhi sach maan lena.

©नीतिश तिवारी।


Saturday, 29 June 2019

तुम्हें पता है?

























Pic credit : pinterest.









मैं अपनी हर बात यूं ही तुमसे नहीं कहता ..
तुम्हें पता है .?? जब मैं तुम्हारे पास होता हूं 
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

तुम्हें खोने का ख्याल आते ही ..
आंसू बहाता हूं पैर पटकता हूं ..
जुल्फें बिखर जाती हैं चेहरा बिगड़ आता है..
ये बेचैनी मैं यूं ही नहीं सेकता
तुम्हें पता है.?? जब मैं तुझे याद करता हूं 
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

दिल की गुल्लक में तेरी हर यादें सहेजे रखा हूं
पर तेरी बेपरवाही देख मैं हक्का-बक्का हूं
जब भी आईने के आगे जाता हूं
तो अपने सामने तुझे ही पाता हूं।।
हवाओं के साथ मैं अब यूं ही नहीं बहता 
तुम्हें पता है.?? जब मैं तुझे मेहसूस करता हूं 
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

जब तू सामने से गुजरती है..
मेरी जान पर आ पड़ती है
मिसाल है तू खुदा की बेहतरीन कारीगरी की
तुझे देखना मानो दीदार हो किसी परी की..
इश्क, मोहब्बत, चाहत का पहाड़ यूं ही नहीं मुझपे ढेहता।।
तुम्हें पता है.?? जब मैं तुझे देखता हूं..
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

©शांडिल्य मनीष तिवारी।

Thursday, 27 June 2019

रूह से मोहब्बत।

























Pic credit : Google.






रूह से रूह की मोहब्बत करोगे तो अच्छा होगा,
तुम हुस्न के करीब मत जाओ, बर्बाद हो जाओगे।

Rooh se rooh ki mohabbt karoge to achha hoga,
Tum husn ke kareeb mat jao, barbaad ho jaoge.

ना गवाह, ना वकील फिर भी सजा उम्रकैद की,
इश्क़ में मुकदमे का अंजाम ऐसा ही होता है।

Na gawah, na wakil fir bhi saja umrquid ki,
Ishq mein mukadame ka anjaam aisa hi hota hai.

ये भी पढ़िए : इश्क़ का ठिकाना।

©नीतिश तिवारी।


Sunday, 23 June 2019

Tum kya jano dard kya hota hai!










Pic credit : Unspoken Voice.







तुम क्या जानो दर्द क्या होता है,
छोटा बच्चा भूख से क्यों रोता है,
इंसान पापी पेट के लिए क्या करता है।

तुम्हें तो बस बंगला गाड़ी पैसा चाहिए,
मेरे जैसा नहीं उसके जैसा चाहिए,
गर्मी में सर्दी और सर्दी में वर्षा चाहिए।

कितनी अजीब ख्वाहिशें हैं तुम्हारी,
हालात को समझ नहीं पाते हो तुम,
सात सुरों की तो धुन ही होती है,
फिर आठवाँ सुर क्यों लगाते हो तुम।

मेरी काबिलियत पर भरोसा रखो,
सब कुछ ठीक कर दूँगा मैं,
फिर मुझे कोई शिकायत ना होगी,
सब कुछ ठीक कर दूँगा मैं।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 21 June 2019

इश्क़ का ठिकाना।













Pic credit: Pinterest.







फूलों की ख्वाहिश तुम्हें है, काँटों से बैर रखते हो,
अपनों की तुम्हें कद्र नहीं, साथ में गैर रखते हो।

Foolon ki khwahish tumhen hai, kaanton se bair rakhte ho,
Apnon ki tumhen kadr nahin, saath mein gair rakhte ho.

आजमा कर देख लेना या देखकर आजमाना,
इश्क़ कर रहे हो तुम जिसका कोई नहीं ठिकाना।

Aajma kar dekh lena ya dekhkar aajmana,
Ishq kar rahe ho tum jiska koi nahin thikana.

©नीतिश तिवारी।

Friday, 14 June 2019

Garib Rath में यात्रा का अनुभव।



















हाँ जी, दोस्तों हाल ही में मैंने रेलवे यात्रा का आंनद उठाया। एक बार फिर से। उसी अनुभव के बारे में आपसे बात करूँगा। लालू यादव के वरदान स्वरूप प्राप्त हुए गरीब रथ में यात्रा का एक अलग ही आंनद है। कहने को तो सारे कोच 3AC हैं लेकिन कोच के अंदर का डिजाइन ऐसा है कि बहुत दिक्कत होती है।  खैर किराया कम है तो कुछ तो दिक्कत उठाना ही पड़ेगा।

दिल्ली से सफर की शुरुआत हो चुकी थी। ट्रेन समय से खुल चुकी थी। भारत में ट्रेन अगर समय से खुल जाए तो ये समझिए कि आपके टिकट का आधा पैसा वसूल हो गया। मैं हमेशा से सबसे ऊपर की बर्थ लेता हूँ ताकि दिन में भी सोने का मन हो तो सोया जा सके। खैर थोड़ी देर तक नीचे ही बैठा रहा। इसी बीच चाय, पानी और कोल्ड ड्रिंक की बिक्री शुरू हो चुकी थी। इतना तक तो ठीक था मतलब जनरल रूटीन। मजा तो अब आने वाला था। 

सामने वाले बर्थ पर एक भाई साहब बैठे थे। उनके पास 2 iphone था, एक छोटा और एक बड़ा। इसके अलावा एक सिंपल वाला फोन भी था। बार-बार एक फोन जेब से निकालते, फिर उसे रखते फिर दूसरा निकालते, फिर उससे बात करते। थोड़ी देर बाद फिर iphone निकालते, गाना सुनते। फिर रखते, फिर निकालते। यही सिलसिला करीब आधे घंटे तक चलता रहा। मुझसे रहा नहीं गया। मैंने पूछ ही दिया, "भाई साहब, आप कौन सा ऐसा बिजनेस करते हैं जो इतने महंगे फोन हैं आपके पास और इतना बिजी हैं आप?"
भाई साहब कुछ बोल नहीं पाए। हाँ, मतलब कुछ लोग ऐसा दिखावा करते हैं जैसे कि अम्बानी की तीसरी औलाद वही हैं। 

अभी ये बात खत्म ही हुई थी कि मेरे पास एक फोन आया बैंक से। बैंक वाला "सर, आपका एक लोन चल रहा है उस पर 2.5 लाख का top up आया है।" मैंने कहा, "अच्छा।" " जी सर, आपका top up आया है। तो कब प्लान कर रहे हैं आप?" मुझे बड़ा गुस्सा आया, मैंने गुस्से भरी आवाज में बोला "भाई साहब, बच्चा प्लान किया जाता है, लोन नहीं, जब जरूरत होगी तब बताऊँगा।" मैंने भी सुना दिया उसे। 

इसी बीच काले कोट वाले भाई साहब आ चुके थे। मैंने अपना टिकट चेक कराया। पड़ोस वाली सीट पर एक महिला अपने छोटे बच्चे को लेकर बैठी थीं। उनका टिकट किसी और के नाम का था। मतलब पुरुष के नाम पर महिला यात्रा कर रही थी। बात करने पर पता चला कि उन्होंने स्टेशन पर ही किसी से एक्स्ट्रा पैसा देकर टिकट खरीदा था। देखने में ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं लग रही थी, सीधा सा मतलब था कि वो ठगी का शिकार हुई थीं। इसमें दोनों की गलती थी, एक हमारे सिस्टम की और दूसरे यात्री की। वहीं पर अगले सीट एक लड़की बैठी थी उसके साथ भी यही मसला था। मैडम ने प्रीमियम तत्काल टिकट लिया था वो भी स्टेशन से। और मजे की बात तो देखिए कि उस टिकट पर बुकिंग डेट 2 महीने पहले की थी। सीधा मतलब था कि वो भी इस ठगी का शिकार हो गयी थी तब जबकि उनके पास iphone था। इस बात से यह सिद्ध होता है कि ब्रांड इस्तेमाल करने से बुद्धि नहीं आ जाती। एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी। मैडम ने फोन मिला दिया किसी को और TC को पकड़ा दिया। मतलब, " लीजिये बात कर लीजिए" वाली प्रथा हिंदुस्तान में कभी खत्म नहीं होगी।

इन सब के बीच रात्रि के 9 बज चुके थे। ट्रेन कानपुर पहुंच चुकी थी। मैंने खाना खाया और सोने के लिए जा ही रहा था कि एक मम्मी ने अपने बच्चे को आवाज लगाते हुए बोला," बेटा रोहन, मोबाइल दे दीजिए। आप बहुत देर से गेम खेल रहे हैं।" कुछ औरतें पब्लिक प्लेस में अपने बच्चों की बहुत इज्जत करती हैं और उन्हें आप बुलाती हैं। भले ही वही बच्चे घर पर दिन भर में चार बार कूट दिए जाते हों। अच्छा बच्चों के साथ एक समस्या और है। एक तो ये हाफ टिकट या बिना टिकट ट्रैवेल करते हैं और ऊपर से शोर बहुत मचाते हैं। हाँ, मतलब सोने में दिक्कत होती है ना। 

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 11 June 2019

मोहब्बत को सलामत रख पाता हूँ।









Pic credit : Google.





तेरी जुल्फों के छाँव तले तेरे होठों की प्यास बुझाता हूँ।
मैं अपनी आरज़ू को इबादत की तरह अपनाता हूँ।
मेरी जिंदगी कभी खत्म ना हो तेरे बगैर।
यही दुआ करके अपनी मोहब्बत को सलामत रख पाता हूँ।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 7 June 2019

Justice for Twinkle.

















आज मन बहुत दुखी है। बस इतना ही लिख पाया।

कैसे कह दूँ यहाँ अल्लाह मौजूद है या भगवान,
हैवानियत का शिकार हो गयी एक बेटी नादान।

राजनीति की रोटियाँ कब तक सेकते रहोगे तुम,
इंसाफ दो बेटी को नहीं तो एक दिन आएगा तूफान।

कैसे हम इस सिस्टम का कर पाएंगे सम्मान,
कुछ बाकी नहीं रहेगा यहाँ ना रहेगा इंसान।


अब किलकारी नहीं गूँजती,
खिलौने एक कोने में पड़े हैं।

कोई बच्चे नहीं आते अब, 
गुड़िया मेरी नहीं रही अब।

क्यों ऐसा जुल्म हो गया,
घर सूना हो गया है।


©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 5 June 2019

Salman Khan slaps security man for being rough with fan kid at Bharat Screening.


















सलमान खान की फ़िल्म भारत रिलीज़ हो चुकी है। लेकिन बीती रात फ़िल्म के स्पेशल स्क्रीनिंग पर जो हुआ वो हैरान करने वाला है। सलमान ने अपने बॉलीवुड के दोस्तों के लिए भारत मूवी की स्पेशल स्क्रीनिंग मुम्बई में रखी थी। खबर है कि सलमान ने वहीं पर एक सुरक्षा कर्मी को थप्पड़ मार दिया।

सूत्रों से पता चला है कि सलमान को गुस्सा इसलिए आया क्योंकि वो सुरक्षाकर्मी गलत तरीके से एक बच्चे से बात कर रहा था। और वो बच्चा सलमान का फैन था। बात चाहे कुछ भी रही हो लेकिन सलमान को अपने गुस्से पर काबू रखना चाहिए। करोड़ों युवा उनको फॉलो करते हैं। इस तरह की हरकत उन्हें शोभा नहीं देती। बाकी आप लोग सलमान के व्यवहार से बखूबी वाकिफ़ हैं।

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 4 June 2019

Mohabbat mein Mahabharat.










Pic credit: pinterest.










ये गीता का ज्ञान 
नहीं ये मोहब्बत
की दास्तान है।

कुरुक्षेत्र बना 
है दिल मेरा
जिसमें तेरे छल
और प्रपंच है
तुम जीतना 
चाहती हो मुझसे 
पर अफसोस
ये मुमकिन ना होगा।

भले ही जज्बात 
रूपी हजारों सैनिक 
हैं तुम्हारे पास 
लेकिन मेरे पास
कृष्ण सरीखा 
धैर्य है 
हौसला है।

ना मैं कर्ण हूँ 
और ना ही
तुम दुर्योधन
जो तुम्हारे मोहब्बत 
के कर्ज तले
मैं दबा रहूँगा।

ना मैं अभिमन्यु
हूँ जो तेरे
भावनाओं के 
चक्रव्यूह में आकर
मार दिया जाऊँगा।

ना मैं धृतराष्ट्र हूँ
ना तुम संजय
जो तुम सुनाओगी
और मैं चुपचाप
सुन लूँगा।

प्रेम के इस
धर्मयुद्ध में
जीत किसकी
होगी ये तो
वक़्त बताएगा।

बस इतना कहना
है तुमसे कि
मोहब्बत में महाभारत
का वक़्त तुमने
गलत चुना है।

©नीतिश तिवारी।