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Showing posts from 2015

जरा सा होश क्या आया...

मेरी हसरतों का हिसाब तुम क्या लगाओगे ऐ ज़ालिम, खयाल आते ही उसे पन्नों पर उतार देता हूँ। मेरी बदहाली में तो किसी ने साथ ना दिया, जरा सा होश क्या आया मुझे, लोग देखने आ गए। मुझे काफ़िर बना के ज़माने ने बेदखल कर दिया, हमने तो थोड़ी सी इल्तज़ा की थी मोहब्बत के खातिर। जरा सी बेरुखी क्या दिखाई वो हमसे दूर हो गए, अरे कश्ती भी नहीं करता दुआ समंदर को छोड़ जाने का। ©नीतिश तिवारी।

जब से देखा है तेरा चेहरा।

रातें कटती अब नहीं, दिन अब ढलता नहीं, जब से देखा है तेरा चेहरा, मेरा दिल अब मुझसे संभलता नहीं। उलझनें अब हटती नहीं, मंज़िलें अब रूकती नहीं, जब से देखा है तेरा चेहरा, धड़कनें अब बढ़ती नहीं। पर्दा अब सरकता नहीं, आशिक़ अब बहकता नहीं, जब से देखा है तेरा चेहरा, बारिश अब बरसता नहीं। खुशबू अब महकती नहीं, आरज़ू अब कोई जगती नहीं, जब से देखा है तेरा चेहरा, ज़िन्दगी अब ठहरती नहीं। ©नीतिश तिवारी।

जीवन की मेरी विश्वास बनी तुम।

जब जब तेरे मुखर बिंदु से, मेरा नाम निकलता है, तब तब मेरे ह्रदय में, एक सैलाब उमड़ जाता है। जब जब तेरे होठों की लाली, चुपके से कुछ कहती है।  तब तब एक नयी कहानी, इस ज़माने में बनती है।  क्यों न बनूँ  दीवाना प्रिये, जब रूप तुम्हारा ऐसा है।   जैसा हुआ है सबका हाल , मेरा हाल भी वैसा है। अधरों की मेरी प्यास बनी तुम, ग़ज़लों की मेरी अल्फ़ाज़ बनी तुम  कैसे रह पाऊँ मैं तेरे बिना जब, जीवन की मेरी विश्वास बनी तुम।  ©नीतीश तिवारी

मुहब्बत की अदायगी.

ज़माने को आग लग जाए तेरे हुस्न की आँच से, कोई भी आशिक़ महरूम ना रहे तेरी मुलाक़ात से, मुहब्बत की अदायगी का तो पता नही मगर, हर कोई माँगना ज़रूर चाहेगा तुझे इस कयनात से. ©नीतिश तिवारी

असहिष्णुता के बहाने मोदी जी को बदनाम करने की साज़िश ।

   कितने अच्छे लग रहे हैं न ये बच्चे,हाथ में तिरंगा लिए हुए। आज मुझे इन बच्चों में अच्छाई  इसलिए नज़र आ रही है कि इन्हे नहीं पता  है कि धर्म,सम्प्रदाय और जाति क्या होता है। इन्हे तो बस इतना पता है की भारत हमारा देश है और ये भारत का तिरंगा झंडा है। पिछले 2-3 महीने से देश में जो धर्म, सम्प्रदाय और जाति के नाम पर जो लोगों को बाँटने का काम किया जा रहा है,सरदार पटेल के इस अखण्ड भारत के सपने के लिए ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। आज देश के एक विशेष वर्ग को लगता है कि देश में असहिष्णुता का माहौल है और ये बढ़ रहा है।  मैं कई दिनों से सोच रहा था कि देश के इस मौजूदा हालात पर कुछ लिखूँ ,लेकिन फिर दिमाग से इस बात को निकाल देता था कि मैं क्या लिखूंगा। सबको तो पता ही है कि क्या हो रहा है और क्या होना चाहिए और क्या नहीं होना चाहिए। लेकिन पिछले दिनों जिस  तरह से असहिष्णुता को लेकर दो लोगों के बयान आये उसने मेरे अंदर के साहित्यकार (सम्मान लौटाने वाला नहीं ) को लिखने पर मजबूर कर दिया।  उन दो लोगों के नाम हैं -मुन्नवर राणा और शाहरुख़ खान। मैं व्यक्तिगत तौर पर इन दोनों का बहुत बड़ा

बस ख्वाहिश यही है कि...

मैं जीत जाऊं या मैं हार जाऊं, बस ख्वाहिश यही है कि मैं दरिया ये पार जाऊं। मैं किसी के दिल में रहूँ या किसी की यादों में रहूँ, बस ख्वाहिश यही है कि मैं अपनों की निगाहों में रहूँ। मैं उजालों में रहूँ या अंधेरों में भटकूँ, बस ख्वाहिश यही है कि मैं अपने मंजिल तक पहुँच सकूं। मेरा नाम हो या मैं गुमनाम हो जाऊं, बस ख्वाहिश यही है कि मैं एक इन्सान बन जाऊं। ©नीतिश तिवारी

ऐसा मुझे दिलदार ना मिला।

मुझे मेरे महबूब से कभी इकरार ना मिला, दोस्ती तो बहुत मिली पर प्यार ना मिला।  हम खरीद लेते पूरा जहान उसके खातिर, पर इस धरती पर ऐसा कोई ज़मींदार ना मिला। और बदलते वक़्त की आबो-हवा तो देखिये,  इन गहरी साँसों का कोई खरीदार ना मिला, हम इलज़ाम लगायें भी तो किस किस पर, कोई भी ऐसा शख्स मुझे कुसूरवार ना मिला।  बड़ा खतरा है इस ज़न्नत के रास्ते में , इस रास्ते पर मुझे कोई पहरेदार ना मिला, और हम लूटा देते अपनी सारी कायनात उस पे, पर अफ़सोस कोई ऐसा मुझे दिलदार ना मिला। ©नीतीश तिवारी

I Love You Baby.

Everyone is here wanna see you and I am also busy in watching you. Just because I feel that you are paragon of beauty,and you are,not because I feel but because GOD has gifted you with such a beauty that someone can't live without watching you.And I'm so glad that you are with me. The way you look at me with your enchanting eyes. The way you kiss me with your juicy lips. A burning desire then generates within me to live with you forever. You are my morning,you are my night. And I'm so happy that you are my life. Every morning I desire for you. Every night creates fire for you. I Love You My Sweet Heart. ©NITISH TIWARY

इतना याद क्यूँ करती हो मुझे.

ऐसा क्यूँ करती हो , तुम बार-बार, कि मेरी आँखों से पहुँच कर, मेरे दिल मे उतर जाती हो. और मैं फिर, एक द्वंद मे फँस जाता हूँ. कि मेरी आँखे खूबसूरत हैं  या मेरा दिल. इतना याद क्यूँ करती हो मुझे, की हिचकियाँ रुकने  का नाम नही लेतीं. और हर बार मैं तुम्हारे पास आने को बेताब हो जाता हूँ. ©नीतीश तिवारी

एक मंज़िल की तलाश थी.

फ़ुर्सत अगर होता तो हक़ीकत बयान करते, बातों से नही अपनी नगमों से दास्तान कहते, ज़िंदगी की इस भीड़ ने दो राहे पर खड़ा कर दिया वरना, मंज़िल की क्या बात थी हमे रास्ते भी सलाम करते. मुझे चमचमाती रौशनी का शौक नही रहा कभी, बस एक अदद दीये की दरकार थी, और मुसाफिर कहते हैं लोग हमे इस भीड़ का, पर मुझे तो सिर्फ़ एक मंज़िल की तलाश थी. ©नीतीश तिवारी

पहचान अभी बाकी है.

  बैठा रहा मैं एक किरदार सा बनके, उलझी हुई तस्वीर का आकार सा बनके, हमारी इबादत कभी मुकम्मल ना हुई, बीच भवंर मे फंस गये मझधार सा बनके. मुस्कुराते लबों की पहचान अभी बाकी है, मचलते हौसलों की उड़ान अभी बाकी है, समंदर से कह दो किनारों से आगे  ना बढ़े, अभी तो नीव पड़ी है, पूरा मकान अभी बाकी है. ©नीतीश तिवारी

बदल दो हिन्दुस्तान.

मत हो अपने लक्ष्य से अनजान, कर दो अब ये नया आह्वान, बहुत हुयी बेकारी की दास्तान, अब ये बदल दो हिन्दुस्तान.  सुखदेव भगत सिंह राजगुरु का, खाली ना जायेगा बलिदान, चाणक्य  विवेकानंद की धरती को, फिर से फिर से बनायेंगे हम महान.  चाहे कितनी भी मुश्किल आ जाये, हम छोड़कर ना भागेंगे मैदान, कर दो सारी दुनिया में ये ऐलान, अब ये बदल दो हिन्दुस्तान.  हमें कसम है गंगा मईया की, कभी झुकने ना  देंगे तिरंगे की शान, दुनिया मत समझे हमें भोला और नादान, नहीं तो कर देंगे सबको हैरान परेशान. हम ऐसा सिस्टम लाएंगे, जिसमे सबका होगा जन कल्याण, सबके होठों पर होगी मुस्कान, तभी तो भारत बनेगा महान.  ना आगाज़ की फ़िक्र ना अंजाम का डर , हम पास करेंगे सारे  इम्तिहान, दुनिया करेगी हमारा सम्मान, अब ये बदल दो हिन्दुस्तान.  ©नीतीश तिवारी

तुम मेरे दिल की सुकून हो.

आ जाओ मेरे साथ, अंधेरा रास्ता है तो क्या, तुम्हारी चमक तो बरकरार है. पता है? मुझे जमाने से कभी, शिकायत ना रही, कि क्या मिला और क्या नही. क्यूंकि  मैं जनता हूँ, कि मेरा रास्ता भी तुम हो , और मेरी मंज़िल भी तुम हो. और इसलिए नही कि  तुम इतनी हसीन हो, बल्कि इसलिए कि  तुम मेरे दिल की सुकून हो. ©नीतीश तिवारी 

तुम्हारे जादू का असर है.

राहत क्यूँ नही देती हो मुझे , तुम अपने बार-बार के इस नखरे से, अपने होठों की हँसी से, अपने पलकों की नमी से, तुम्हारे इस मुस्कुराने की अदा के, दीवाने हैं करोड़ो, और उनमे शामिल एक मैं भी हूँ, तो क्यूँ ना शिकायत करूँ तेरी. जब तुम चलती हो, तो वक़्त कही थम सा जाता है, भवरे गुनगुनाते नही, चिड़ियाँ चहकती नही, नादिया बहती नही, सब तुम्हारे जादू का असर है, ना जाने कहाँ से सीखा है, सबको अपने वश मे करना, और मुझे भी. ©नीतीश तिवारी

वो खूबसूरत एहसास.

वो खूबसूरत एहसास. जब समंदर के किनारे, लहरों से लहरें टकराती हैं, तब तेरे होने से मुझे, जीने की वजह नज़र आती है. वो खूबसूरत एहसास. जब बहकी इन फिजाओं में, तेरी खुश्बू महकती है, तब तेरे होने से मेरे, साँसों मे एक आस सी  जगती   है. ©नीतीश तिवारी

Mountain Dew में से निकला कचरा.

  Mountain Dew का टैग लाइन है डर के आगे जीत है. मतलब इसको पीने से आप लाइफ में जीतेंगे ही जीतेंगे लेकिन  कल  अगर मैं इसे पी लेता तो जीतने की बात तो छोड़ दीजिए, शायद मैं हारने के भी काबिल नही रहता. जी हाँ कल जब मैं Mountain Dew जैसे ही पीने वाला था देखा की इसमे तो कुछ कचरा है. ये फोटो उसी बोतल की है जिसे मैं पीने वाला था.ध्यान से देखिए आपको कुछ नज़र आएगा. वो तो मेरी आदत है क़ि मैं ढक्कन खुलने के बाद देख कर पीता हूँ इसलिए मैं बच गया और फिर उसे फेकना पड़ा. जाहिर सी बात है मुझे नुकसान हुआ ना सिर्फ़ रुपये का बल्कि उस विश्वास का जो इतने दिनो से इस ब्रांड के प्रति बना हुआ था. जब कभी टीवी पर आता था क़ि सॉफ्ट ड्रिंक्स में कीड़ा निकला या छिपकीली निकली या कई लोग मुझे मना करते थे पीने से तो विश्वास ही नही होता था क़ि ऐसा कैसे हो सकता है. मतलब multinational brand जिसका अरबों रुपये का टर्न ओवर हो उसे बनाने wale ऐसी ग़लती कैसे कर सकते हैं. जीतने भी सॉफ्ट ड्रिंक्स हैं चाहे वो पेप्सीको का हो या कोक का उन सबमे mountain dew मेरा फ़ेवरेट था लेकिन अब मैं सॉफ्ट ड्रिंक्स नही पीऊंगा

कुछ डायरी के पन्नो से.

सारी कारीगरी खुदा ने तुम पर नेमत कर दी, और तुम्हारी शिकायत कि हर कोई तुम्हे देखता है. अपने होठों पर हँसी यू ही बनाए रखना, अपने दिल मे कोई राज़ यू ही छुपाए रखना, मैं रहूं या ना रहूं तेरे वज़ूद में, पर किसी शख्स को अपने वज़ूद मे बनाए रखना. कोई ख्वाब गर टूटे तो संभाल लेंगे हम, तेरे दिल में छुपे राज़ को जान लेंगे हम, बेवफ़ाई करनी हो तो बड़ी शिद्दत से करना वरना, मौत आने पर भी खुदा से तुझे माँग लेंगे हम. © नीतीश तिवारी

It's only for you baby.

वो सपने मे आकर कहती है,"तुम इतना सपना क्यूँ देखते हो?" मैं सिर्फ़ इतना कह पता हूँ,"तुम जो हर रोज़ आती हो यहाँ." न जाने कौन सी कसक है तेरी यादों मे, जो मैं तुझे देखे बिना नही रह सकता. कोई खता हो जाए तो माफ़ कर देना मगर तुम्हारी खूबसूरती को बयान किए बिना नही रह सकता. © नीतीश तिवारी

एक हक़ीकत.

ये परिंदे जो उड़ने को बेताब हैं, उनके ये पर तुम क्यूँ काटते हो. ये बच्चे जो एक-एक दाने को मोहताज़ है, उनके बीच ये जूठन क्यूँ बाँटते हो. मेरे उड़ने की दास्तान बहुत लंबी नही लेकिन, मेरे ही हिस्से का जायदाद तुम क्यूँ चाहते हो. दुनिया जानती है मोहब्बत मे कुछ हासिल ना हुआ, फिर खुदा से उसकी ही फरियाद क्यूँ करते हो. © नीतीश तिवारी

अभी रुको.

अभी रुको, तुम्हारी आँखें कुछ कह रही हैं, मुझे पढ़ने दो, इसमें छुपे हुए जज़्बात को।  अभी रुको, इन ज़ुल्फ़ों को मत हटाओ, अपने चेहरे से, ये याद दिलाती हैं मुझे। जब हम बैठा करते थे, खुले गगन के नीचे, चंद मुलाक़ातें थी वो, जो भूले नहीं भुलातीं।  अभी रुको, अपने होठों को मत हटाओ, मेरे होठों से, थोड़ा बढ़ जाने दो, प्यार का ये पागलपन , उतर जाने दो , दरिया की गहराई में।  © नीतीश तिवारी

कशमकश ज़िंदगी की.

अंज़ाम की फ़िक्र, आगाज़ का डर. कशमकश ज़िंदगी की, न इधर जाए न उधर. © नीतीश तिवारी

Truth Lies In You.

It may be true, That I won't get you. But it's also true, That I love you. With the anger voice, For the other's choice. You left me Between water and ice. It may be true That you will be happy, But it's also true That I won't be happy. In the darkest night You were my only sight. In the heavy rain, I want to see you again. © Nitish Tiwary.  

तेरे प्यार मे आबाद मैं.

सवाँरु तेरी पलकों से कोई  ख्वाब मैं, अंधेरों में खो जाऊं बनके कोई जवाब मैं, गुज़ारा नही होता तेरी यादों के बिना, किस-किस तरह दूँ प्यार का हिसाब मैं. रुकती है नज़रें मेरी सिर्फ़ तेरे ही चेहरे पर, कैसे ना देखूं ये खिलता हुआ गुलाब मैं, भले ही किसी को मुहब्बत हासिल ना हुई हो, पर रहना चाहता हूँ तेरे प्यार मे आबाद मैं. © नीतीश तिवारी 

मस्ती भरी शायरी.

यहाँ हर दिया बुझने पर मजबूर है, और तुम रौशनी की दरकार करते हो, खुदा के कैसे बंदे हो तुम जो, हर सहरी पर इफ्तार करते हो. वो वक़्त भी गुलाम था  वो हुस्न भी कमाल था, हर गली मे मचा बवाल था, क्योंकि मेरे शहर मे उसका ननिहाल था. © नीतीश तिवारी।

Happy Mother's Day.

जब कभी दिल घबराए, जब कभी रोना आए, जब कभी नींद ना आए, तो माँ ही लोरी सुनाए. जगत का पालनहार है तू, सबके दिलों का प्यार है तू, सारी खुशियाँ तुझसे है आती, सबको जीना तू सिखाती.                        © नीतीश तिवारी।

दिल लुटाएं कैसे.

कि कोई आए तो आए कैसे, मुझको भाए तो भाए कैसे. अपना बनाए तो बनाए कैसे, हम दिल लुटाएं तो लुटाएं कैसे. कोई खुश्बू महकाय तो महकाय कैसे, कोई आरज़ू जगाए तो जगाए कैसे. अपनी बेबसी बताएँ तो बताएँ कैसे, अपनी खुशी छुपाएँ तो छुपाए कैसे. © नीतीश तिवारी

होठों की मुस्कान लेकर लौटा हूँ.

ढूँढ रहा था जिस पल को उसमे होकर लौटा हूँ, मैं मुसाफिर हूँ यारो सब कुछ खोकर लौटा हूँ, और तुम क्या जानोगे अदब मेरी दीवानगी का, उसके होठों की मुस्कान को मैं लेकर लौटा हूँ. कोई वो पल ना था जिस पल मैं तड़पा  नही, सारे गमों को अपने मैं सॅंजो कर लौटा हूँ, दुनिया मुझसे नफ़रत करे फिर भी मुझे गम नही, सबके दिल मे एक प्यार के बीज़ बो कर लौटा हूँ. © नीतीश तिवारी 

shayri

ऐ खुदा  कैसा वो मंज़र होगा, जब सारा समंदर बंज़र होगा, लोग तरसेंगे एक एक बूँद को, तब तू ही जहाँ का सिकंदर होगा. © नीतीश तिवारी

जुल्फों के नज़ारे बहुत हैं.

आसमाँ में तारे बहुत हैं, मेरे लिए सहारे बहुत हैं. तुझे क्या खबर ओ ज़ालिम, तेरी जुल्फों के नज़ारे बहुत हैं.  © नीतीश तिवारी 

बैठा है एक पहरेदार.

अब और नहीं कर सकता मैं इंतज़ार , क्यूंकि मुझे हो गया है तुझसे प्यार, तुम भी आ जाओ कर लो इकरार , नहीं तो फिर से आ जायेगा वो इतवार।  दुनिया मुझे कहती है मोहब्बत में बीमार, क्यूंकि साथ मिला है तेरा मुझे बेशुमार , तेरे दरवाज़े पे बैठा है एक पहरेदार, हम कैसे जा पाएंगे छोड़कर घर-बार।  © नीतीश तिवारी 

हालात

पत्ते बिखर गये हैं, आओ इनको समेट लें, हुनर निखर  गये हैं, आओ इनको सहेज लें. रिश्ते बिगड़ गये हैं, आओं इनको बना लें. अपने बिछड़ गये हैं, आओ इनको मना लें. © नीतीश तिवारी 

Happy Holi to Everyone | होली की हार्दिक शुभकामनाएं।

                        खुशियों की बहार है,                         रंगों की बौछार है,                         फिर से आया ,                         होली का त्योहार है.                         नये नये पकवान हैं,                         आए घर मेहमान हैं,                         मिलकर खुशियाँ बाँट रहे,                         पूरा सब इंतज़ाम है. Khushiyon ki bahar hai, Rangon ki bauchhar hai, Phir se aaya, Holi ka tyohaar hai. Naye naye pakwan hain, Aaye ghar mehman hain, Milkar khushiyan baant rahe, Poora sab intzaam hai.                       © नीतीश तिवारी ।                      Ye bhi dekhiye:                        

मैं ग़ज़ल लिखता हूँ.

फ़ुर्सत में मैं ग़ज़ल लिखता हूँ, तेरी यादों का एक सफ़र लिखता हूँ. वो वक़्त जो थम सा गया था कभी, उस वक़्त की रगुजर लिखता हूँ. काली घटा और तेरी ज़ुल्फ़ो के बीच, गुजरा हुआ वो मौसम लिखता हूँ. हर एक रंग में और तेरे संग में, सपनो का एक शहर लिखता हूँ. कुछ बदहाली में तो कुछ खुशहाली में, ज़िंदगी का ये भ्रम लिखता हूँ. तेरी खुश्बू में और तेरी जूस्तजू में, अपने होने का वो वहम लिखता हूँ. तेरी धड़कन में और तेरी तड़पन में, अपने साँसों का वो सितम लिखता हूँ. तेरी आवारगी में और तेरी दीवानगी में, भटकते राहों का मंज़िल लिखता हूँ. फ़ुर्सत में मैं ग़ज़ल लिखता हूँ, तेरी यादों का एक सफ़र लिखता हूँ. अगर आपको मेरी ये ग़ज़ल पसंद आई हो तो शेयर ज़रूर कीजिए. धन्यवाद. © नीतीश तिवारी

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