प्रेम गीत- काजल को स्याही बनाके।





                  

















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तेरी आँखों के काजल को स्याही बनाके लिख दूँ,
मैं अपनी ग़ज़ल में तुझको हमराही बनाके लिख दूँ।

तेरी पायल करती शोर है हम जब भी मोहब्बत करते हैं,
इस पायल की छन छन को गवाही बनाके लिख दूँ।

चाँद करता रहता है पहरा, पूर्णिमा की रात को,
तुम कहती हो तो चाँद को सिपाही बनाके लिख दूँ।

गुनाह है मोहब्बत में अगर छुप छुप कर मिलना,
फिर मैं भी अपने को अपराधी बनाके लिख दूँ।

©नीतिश तिवारी।

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