एक तमन्ना तुम्हें गुलाब देने की, एक झिझक तुम्हारे मना करने की, साल दर साल गुजरते गए, कई गुलाब खिले कई मुरझा गए, पर ख्वाहिश आज भी …
Read moreमहकती हुई ख़त में, मुरझाया वो गुलाब होगा, जो आने वाला कल है वो लाजवाब होगा, तुझे देखना है बहुत कुछ अभी ज़िन्दा रह, तेरे दिए हुए एक एक …
Read moreमैं महबूब से मोहब्बत का हिसाब माँगूंगा, उन उलझे हुए सवालों का जवाब माँगूंगा। मैं जा रहा हूँ उसकी गली में फिर से, उसकी किताब म…
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