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Showing posts from January, 2020

High School Love.

Picture courtesy: Google. High School Love. "Do you've any idea what you are  talking about?" Garima Shouted in frustration. "Yes, I understand what I'm talking about and this is better for both of us." Rakesh replied politely. Garima and Rakesh were childhood friends studied in school together. Now both of them had passed high school and  they were about to enroll in 11th standard. But Rakesh father got transfer letter yesterday and now they were moving to Varanasi from Lucknow. However, Garima and her family were still in Lucknow and she wanted to study with Rakesh. Unfortunately it was not possible now due to transfer of Rakesh's father.  "It's okay if you want to leave me and this city but don't forget to call me." Garima urged to Rakesh. "I will call you if I have time. I'm going to new city and will meet new people. Life is all about change. And we should accept that." Garima was shocked and stun

प्यार की खुशबू।

Photo credit: Google. वो दरख्तों से आती थी हवा के झोंके, तुम्हारी खुशबू अब उनमें आती नहीं, वो यादें जो दिल में बसेरा कर गयी हैं, मेरे दिल से कभी अब वो जाती नहीं। वो फूलों का खिलना भौरों का मचलना, वो बगीचे की मिट्टी की सौंधी सी खुशबू, जब से गयी हो तुम  ऐसा हुआ है, वो कोयल भी अब गीत गाती नहीं। ©नीतिश तिवारी।

मुफ़लिसी के दौर ने।

Pic credit: Pinterest. मेरी हर आरज़ू को तिश्नगी बनाकर रख दिया, गिरने का डर ऐसा कि पत्थर हटाकर रख दिया, लब तो आज़ाद थे फिर क्यों उन पर ताले पड़ गए, मुफ़लिसी के दौर ने मेरी हस्ती मिटाकर रख दिया। Meri har aarzoo ko tishnagi banaakar rakh diya, Girne ka darr aisa ki pathar hatakar rakh diya, Lab to aazad the phir kyun un par tale pad gaye, Muflisi ke daur ne meri hasti mitakar rakh diya. ©नीतिश तिवारी।

कैसे करुँ इज़हार-ए-मोहब्बत!

Photo courtesy: Google. कैसे करुँ इज़हार-ए-मोहब्बत, जरा तुम ये बतलाओ हमें, दुनिया जहाँ को भूल बैठे हैं, अब यूँ ना तड़पाओ हमें। साथ रहो तो सब मुमकिन है, दूर रहकर क्या हासिल हुआ, दिन के आठ पहर में से, एक पहर गर भूल भी जाऊँ, मैं प्यार नहीं करता तुमसे, ये कहकर ना झूठलाओ हमें, कैसे करूँ इज़हार-ए-मोहब्बत, जरा तुम ये बतलाओ हमें। ©नीतिश तिवारी।

साथी कभी साथ ना छूटे।

Pic credit: Google. तेरी राहें देखते देखते, कितनी सदियाँ गुजारी मैंने। सूनी गलियों में जाकर, सिर्फ ख़ाक ही छानी मैंने। अब देर ना कर मेरे पास तू आ, बिंदिया काजल चूड़ी कंगन, तेरे लिए मँगा ली मैंने। साथी अब कभी साथ ना छूटे, रब से यही दुआ माँगी मैंने। ©नीतिश तिवारी।

ऐसे मौसम में।

फोटो : गूगल से साभार। फूलों का रंग गुलाबी और तुम्हारे होठों का भी धूप की चादर बिखरी है और  सर्द हवाएँ भी कौन होश में  रह पाएगा ऐसे मौसम में जाम छलक ही जाएगा ऐसे मौसम में ©नीतिश तिवारी।

कुछ बाकी है तो।

photo credit : unsplash कुछ बाकी है तो बोल दो, दिल के दरवाजे खोल दो, बाद में कुछ नहीं रह जाएगा, पंछी पिंजरा से उड़ जाएगा। सात सुरों की सरगम में से, एक भी सुर ना लग पाएगा। कुछ बाकी है तो बोल दो, बातों में मिसरी घोल दो। Ye bhi padhiye:  अबके बरस तुम आना। ©नीतिश तिवारी।

Happy New Year 2020

Photo credit: Google आज इस ब्लॉग की सातवीं वर्षगाँठ के साथ साथ नया साल भी है। पिछला वर्ष इस ब्लॉग के लिए बहुत अच्छा रहा। मैंने ज्यादा से ज्यादा रचनाएँ लिखने की कोशिश की। इस वर्ष भी प्रयास रहेगा कि बेहतर रचनाओं के साथ आप सभी से संवाद कर सकूँ।  इस वर्ष मैंने अपनी एक किताब "फिर तेरी याद आई" भी प्रकाशित की।  आप इस लिंक पर क्लिक करके किताब खरीद सकते हैं। फिर तेरी याद आई नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ ये रचना। मैं चुप हूँ,  खामोश हूँ, पर नाराज़ नहीं हूँ, मैं कल भी था,  कल भी रहूँगा, पर आज नहीं हूँ। धड़कन हूँ, संगीत हूँ, पर दिल का  साज़ नहीं हूँ। धरना हूँ प्रदर्शन हूँ पर सच्ची  आवाज़ नहीं हूँ। बंजारा हूँ, आवारा हूँ पर परवाज़ नहीं हूँ। मैं चुप हूँ,  खामोश हूँ, पर नाराज़ नहीं हूँ, ©नीतिश तिवारी। ये भी देखिए।

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