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Showing posts from August, 2018

Sunday- Short Story (laghukatha)

वरुण ऑफिस से घर आया तो पत्नी को गुस्से में पाया। उसने पूछ ही दिया, "क्या हुआ वंदना, क्यों गुस्से में नजर आ रही हो?" वंदना ने मुँह चिढ़ाते हुए तपाक से जवाब दिया, "गुस्सा ना करूँ तो क्या करूँ, आपने पिछले संडे वादा किया था कि इस संडे फिल्म दिखाऊंगा। और आज आप संडे को भी काम पर चले गए।" वरुण ने विनम्रता पूर्वक अपनी पत्नी से बोला, "इस संडे काम करने इसलिए गया था ताकि अगले संडे हमलोग फिल्म देखने जा सकें। मेरे पास पैसे नहीं थे।" वंदना चुपचाप खड़ी पति के चेहरे को निहार रही थी। ©नीतिश तिवारी।

इश्क़ के चर्चे।

तुम्हारे हिस्से के इश्क़ को मैं दफना चुका हूँ, अब नए महबूब को मैं अपना चुका हूँ। पुराने इश्क़ को सरेआम करने की धमकी मत दे, अपने महबूब को तुम्हारे चर्चे मैं सुना चुका हूँ। ©नीतिश तिवारी।

Adhura Pyaar.(incomplete love)

आज सुबह जब पत्नी के साथ बैठकर चाय के साथ अख़बार पढ़ रहा था तो अचानक ही एक जाना पहचाना चेहरा दिखा. खबर थी कि,"सरपंच के रूप में उत्कृष्ट काम कर रही हैं नीलिमा".  उसका नाम पढ़ते ही दिल में एक हलचल सी हुई. ये वही नीलिमा थी जो इंजीनियरिंग की तैयारी करते समय कब दोस्त बन गयी और दोस्ती कब प्यार में बदल गयी, पता ही नहीं चला था. पत्नी के जाने के बाद मैने ध्यान से फोटो देखा  और खबर पढ़ी.  पर हैरान इस बात से था कि वो तो IIT Delhi से बीटेक कर चुकी थी. फिर सरपंच कैसे बन गयी. कई बरसों बाद आज अचानक से उससे बात करने का मन हो रहा था. लेकिन मेरे पास उसका कोई नंबर नहीं था. दिन भर ऑफीस में इंटरनेट पर उसे ढूंढता रहा. फिर फेसबूक पर एक फ़्रेंड से उसका नंबर मिला. ऑफीस से निकलते ही मैने फ़ोन मिलाया. 'हैलो, कौन?" उधर से एक मीठी आवाज़ आई. कुछ सेकेंड तक मैं चुप रहा. फिर बोला, "मैं बोल रहा हूँ."  "मैं कौन?" उसने सवाल किया. फिर भी मैं चुप रहा. फिर थोड़ी देर बाद उससने बोला, "कौन? रोहित?" मैने कहा, "हाँ". शायद अब भी उसे मेरी

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