Skip to main content

Posts

Showing posts from December, 2015

जरा सा होश क्या आया...

मेरी हसरतों का हिसाब तुम क्या लगाओगे ऐ ज़ालिम, खयाल आते ही उसे पन्नों पर उतार देता हूँ। मेरी बदहाली में तो किसी ने साथ ना दिया, जरा सा होश क्या आया मुझे, लोग देखने आ गए। मुझे काफ़िर बना के ज़माने ने बेदखल कर दिया, हमने तो थोड़ी सी इल्तज़ा की थी मोहब्बत के खातिर। जरा सी बेरुखी क्या दिखाई वो हमसे दूर हो गए, अरे कश्ती भी नहीं करता दुआ समंदर को छोड़ जाने का। ©नीतिश तिवारी।

जब से देखा है तेरा चेहरा।

रातें कटती अब नहीं, दिन अब ढलता नहीं, जब से देखा है तेरा चेहरा, मेरा दिल अब मुझसे संभलता नहीं। उलझनें अब हटती नहीं, मंज़िलें अब रूकती नहीं, जब से देखा है तेरा चेहरा, धड़कनें अब बढ़ती नहीं। पर्दा अब सरकता नहीं, आशिक़ अब बहकता नहीं, जब से देखा है तेरा चेहरा, बारिश अब बरसता नहीं। खुशबू अब महकती नहीं, आरज़ू अब कोई जगती नहीं, जब से देखा है तेरा चेहरा, ज़िन्दगी अब ठहरती नहीं। ©नीतिश तिवारी।

जीवन की मेरी विश्वास बनी तुम।

जब जब तेरे मुखर बिंदु से, मेरा नाम निकलता है, तब तब मेरे ह्रदय में, एक सैलाब उमड़ जाता है। जब जब तेरे होठों की लाली, चुपके से कुछ कहती है।  तब तब एक नयी कहानी, इस ज़माने में बनती है।  क्यों न बनूँ  दीवाना प्रिये, जब रूप तुम्हारा ऐसा है।   जैसा हुआ है सबका हाल , मेरा हाल भी वैसा है। अधरों की मेरी प्यास बनी तुम, ग़ज़लों की मेरी अल्फ़ाज़ बनी तुम  कैसे रह पाऊँ मैं तेरे बिना जब, जीवन की मेरी विश्वास बनी तुम।  ©नीतीश तिवारी

Subscribe To My YouTube Channel