बिखर रहा है ज़माना,
रो रहा है मेरा प्यार,
उजड़ रही है खुशियाँ,
हँस रहा है अंधकार.

हर तस्वीर हुई धुँधली,
हर तकदीर हुई पुरानी,
दास्तान हुई और लंबी,
अब नही बची मेरी कहानी.

भटक रहा हूँ राहों मे,
ना जाने कैसा अंज़ाम था,
तड़प रहा हूँ हर साँसों मे,
ना जाने ये किसका गुलाम था.

सुलग उठी है चिंगारी,
मचल रहे हैं अरमान,
कह रही है धड़कन,
ये तो बस है इम्तिहान.

प्यार के साथ
 आपका नीतीश