बिहार की सर्द रातों में, जहाँ ठंडी हवाएँ पुरानी लोकगाथाओं की सरगम बिखेरती थीं, वहीं मैं रहता हूँ, एक कवि। दिन में एक रचनाकार, एक सपनों का सौदागर और…
Read moreसुनों, नया साल शुरू हो गया है। अब फिर से तुम मेरी ज़िंदगी को उदासियों से लबरेज़ करके अपनी हसीन दुनिया में खो जाओगी। और…
Read moreकभी-कभी शब्द नहीं मिलते, फिर भी खयालों को बुनने का मन करता है। नदी किनारे सीप की मोतियों को यूँ ही चुनने का मन करता है। …
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