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तुम जौहरी नहीं बन पायी।








पहले मैं तुम्हारी तस्वीर देखता था

अब तुम मेरे सामने हो

पर कुछ भी तो नहीं बदला

पहले तुम निर्जीव थी

अब तुम बेजान हो।


तुम जौहरी नहीं बन पायी

तुम अभी भी मुझे

कोयला समझती हो

मैं किसी और का 

बादल बनूँगा

तुम्हें रेगिस्तान 

मुबारक हो।


©नीतिश तिवारी।

 

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