Types of lazy people
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आलसी लोगों का ना अपना अलग ही स्वैग रहता है। उनके लिए तो ऐसा है कि टेबल पर पानी रखकर दे दो उसमें भी वो लोग straw घुसेड़ कर पीना पसंद करते हैं।

मेरा एक फ्रेंड तो कॉलेज के दिनों में हर एक एग्जाम में दो तीन सवाल तो ऐसे ही छोड़ देता था। भले ही उसका जवाब उसे आता हो और टाइम भी बचा हो। पूछने पर बोलता कि, "यार लिखने को मन ही नहीं कर रहा था और पास होने जितना तो लिख ही दिया है।"

हमारे गाँव में एक जरऊ बाबा हैं। जरऊ नाम उनका बचपन से ही है काहे कि बाबा जी (तब बाबा नहीं थे) बचपन में टायर को जला कर होलिका दहन कर रहे थे।
ज्यादा जोश में आ गए और हाथ जला बैठे। तभी से उनका नाम जरऊ पड़ गया। इनके बारे में फेमस है कि ये इतने आलसी हैं, इतने आलसी हैं कि सिर्फ 14 जनवरी और 14 अप्रैल को ही नहाते हैं। गाँव के आलसी लौंडे जरऊ बाबा को अपना गुरु और आदर्श मानते हैं। ऐसे ही लौंडों के लिए आजकल लूना में भी सेल्फ स्टार्ट आने लग गया है। और यही लौंडे आजकल सिगरेट भी होम डिलीवरी से मँगाने लगे हैं। 

मेरी पुरानी वाली गर्लफ्रेण्ड तो इतनी आलसी थी कि उसे जब भी कोई गिफ़्ट देना होता था तो लिफ़ाफ़े में पैसे ही दे दिया करती थी। बोलती थी कि कौन इतना मेकअप करे, फिर धूप से बचने के लिए छाता ले और फिर तुम्हारे लिए शॉपिंग करने जाए। 

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कुछ लोग तो इतने आलसी थे कि अपने फोन से chinees app डिलीट नहीं कर पा रहे थे जैसे कि app को टच करते ही उनके उंगली में इंफेक्शन हो जाएगा। सरकार ने पूरा राड़ा ही खत्म कर दिया। Bulk में app ban कर दिए।
बोलो भारत माता कि जय।
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©नीतिश तिवारी।