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Showing posts from December, 2018

Why Thackeray's trailer is different in Hindi & Marathi?

Why Thackeray's trailer is different in Hindi & Marathi? In Hindi trailer Power of Thackeray mentioned directly . Whole country will see the movie in Hindi hence specially Hindu community should be influenced. In Marathi trailer they first mentioned Struggle of Bala Sahab Thackeray then power is there. They want to tell people that how much Thackeray did for betterment of Marathi people. Also read:  वन्दे मातरम बोलने से परहेज़ क्यों! As a whole he was a great man. He used to speak directly. He was the only person who challenged Pakistan openly. There is lots of respect for him. When he died whole Mumbai was shut down , there were lakhs of people in his funeral. That is not possible for a common man unless you did some incredible work for the country . He fought for the Marathi people. He used to help many . That is why people still love him. It would be interesting to watch his journey on silver screen.  ©Nitish Tiwary.

Tera haal kya hai!

तुम बताओ तो सही तेरा हाल क्या है, जवाब दे दूँगा मैं तेरा सवाल क्या है। जी करता है तुझे एक गुलाब दे दूँ, इस बारे में तेरा खयाल क्या है।  सर्दी में भी माहौल गर्म हो रहा है, जरा पता तो करो ये बवाल क्या है। मेरा दिल तो रोज़ धड़कता है यहाँ, उधर तेरे दिल का हाल क्या है। ©नीतिश तिवारी। ये भी देखिए। 

Why congress is demanding ban on the movie- The Accidental Prime Minister.

Why congress is demanding ban on the movie- The Accidental Prime Minister. हाँ जी भईया, तो बात ये है कि मनमोहन सिंह जी की जीवनी पर एक फ़िल्म बनकर तैयार है जिसकी रिलीज़ की तारीख 11 जनवरी 2019 तय की गई है। फ़िल्म का नाम है- The Accidental Prime Minister. फ़िल्म पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू के किताब पर आधारित है। फ़िल्म में मनमोहन सिंह का किरदार अनुपम खेर ने निभाया है और संजय बारू का किरदार अक्षय खन्ना ने। और भी कुछ मंझे हुए कलाकार हैं जिन्हें देखना दिलचस्प रहेगा। अब मीडिया सलाहकार का सीधा सा मतलब है कि आपके सरकार और कार्यकाल के बारे में बहुत सारी जानकारी रखना। जाहिर सी बात है कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान संजय बारू उनके मीडिया सलाहकार थे तो उनको भी बहुत सारी ऐसी बातें पता होंगी जो आम लोगों को नहीं पता है। तभी उन्होंने किताब भी लिखी थी। अब आप सोंच रहे होंगे कि इसमें नया क्या है? बहुत सारे लोगों के बारे में किताब लिखी जाती है और उनपर फ़िल्म भी बनती है। नयी बात ये है कि फ़िल्म का ट्रेलर आते ही विवादों में घिर गई है। और कांग्रेस द्वार

Ishq mein bagawat. इश्क़ में बगावत।

सुनो, तुम्हें ये बार-बार जो इश्क़ में बग़ावत करने का मन करता है ना तो आज ही कर लो इश्क़ में बग़ावत। और फिर देखना, तुम मेरी सियासत इश्क़ में। ये जो कबूतर रोज तुम्हारी छत पर बैठते हैं ना उनको दाना हम डालेंगे और उन्ही कबूतरों से संदेशा भिजवाएंगे किसी और के नाम। इश्क़ को तिज़ारत बनाने की जुर्रत जो तुमने की है उसकी सजा मुझे मिल रही है। लेकिन तुम परेशान मत होना कभी मोहब्बत में इबादत मैं करूँगा अपने इश्क़ की हिफाज़त मैं करूँगा। ©नीतिश तिवारी।

Romantic shayri.

ये रौशनी और उनका दीदार, ये बरसात और मौसम का खुमार, मुझे तड़पाये उनके आने का इंतज़ार, ना जाने कब होगा ये त्योहार। तेरी आँचल से छुपा लूँ अपने दामन को, तेरी खुशबू से महका लूँ अपनी साँसों को, कशिश है तुम्हारे आने की बस एक बार, तेरी नींदों से जगा लूँ अपने ख्वाबों को। ©नीतिश तिवारी।

Mehndi Rachaye toh hoge.

कुछ रंग प्रीत के सजाए तो होगे, गीत मेरे कभी गुनगुनाए तो होंगे। जानता हूँ तुम्हें कोई भाता नहीं है, तुम मुझे देखकर मुस्कुराए तो होगे। उलझनों से सुलझती मोहब्बत हमारी, मेरे दिल में है बसती ये चाहत तुम्हारी। मुझको आने लगी है अजब खुशबू, हाथ मेंहदी से तुमने रचाए तो होंगे। ©नीतिश तिवारी।

तुझे याद करने की।

मैंने तो कहा था कि मुझे भूल जाओ, पर तुम्हारी ही ज़िद थी याद करने की। ना दिल दिया कभी, ना कभी प्यार किया, फिर कौन सी वजह है मुझे याद करने की। सूखे पत्ते, बिखरे मोती, सब कुछ अंजान, ये मौसम नहीं है अब याद करने की। बगावत, सियासत, उल्फत और शिकायत, ये कैसी सज़ा मिली है तुझे याद करने की। ©नीतिश तिवारी।

मोहब्बत में शह और मात।

तुम्हें क्या बताएँ दोस्तों दिल की दास्तान, मोहब्बत में हमने शह और मात देखी है, मेरी नम आँखों को देखकर आप हैं हैरान, बिना बादल के हमने एक बरसात देखी है। चाँद छुपता रहा चाँदनी के आगोश में, फिर भी तन्हाई वाली हमने वो रात देखी है। ज़ुल्फ़ें सँवरती रही न जाने किस किस की, अपनी उलझनों की हमने सौगात देखी है। अब मंज़ूर नहीं मोहब्बत के कायदे हमको, इस खेल में शतरंज की हर बिसात देखी है। ©नीतिश तिवारी।

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