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Showing posts from October, 2018

लघुकथा- माशूक़ा का कॉन्ट्रैक्ट।

माशूक़ा का कॉन्ट्रैक्ट। भोला यादव इश्क़ में नाक़ाम हो जाने के बाद शहर के मशहूर डॉन अज्जू भाई के पास काम के लिए पहुँच चूका था। अपराध की दुनिया में अज्जू भाई को नए लड़कों को काम देने के लिए जाना जाता था। "अज्जू भाई ये नया लड़का गैंग ज्वाइन करना चाहता है। " अज्जू भाई के ख़ास ने उनसे परिचय करवाते हुए कहा। "क्या नाम है रे तेरा ?" "जी, भोला, भोला यादव।" "ठीक है भोला ये ले फोटो।  इसके पीछे पूरी डिटेल लिखी हुयी है। इसको कल टपकाना है।" अज्जू भाई ने बिना देर किये हुए फोटो का लिफाफा थमा दिया और काम पर लग जाने को कहा। भोला ने जैसे ही लिफ़ाफ़ा खोला, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। फोटो एक लड़की की थी। वही लड़की जिसने प्यार में भोला को ये कहकर धोखा दिया था कि 'तुम अभी भोले हो।' फोटो के पीछे कल लड़की को मारने का समय लिखा था- शाम को 5 बजे सिटी मॉल के बाहर। भोला ने बिना किसी देरी किये अज्जू भाई को फोन मिलाया। "भाई, मैं भोला।" "हाँ, बोल।" "भाई इस लड़की को कौन मरवाना चाहता है?" "अरे तुझे उससे क्या?

मुलाक़ात होने वाली है.

आज उनसे एक मुलाक़ात होने वाली है, जो अधूरी रह गयी थी, वो बात होने वाली है. चाँद, तारे  सब आ जाओ गवाह बनने, फिर से वो चाँदनी रात होने वाली है.  इश्क़ में डूब जाने का लंबा  इंतज़ार किया है मैंने, अपने महबूब से मोहब्बत की शुरुआत होने वाली है. भींग जाऊँगा मैं  उन्हें आगोश में लेकर, आज मोहबत की नयी बरसात होने वाली है.  ©नीतिश तिवारी।

ऐसा हुनर रहता है।

तेरे होने से ना जाने क्यों मुझे डर लगता है, ऐसा तो नहीं कि तेरे पास कोई खंज़र रहता है। भरोसे के लायक ना तूने मुझे छोड़ा ना ज़माने को, अब तो इन आँखों में आँसुओं का समंदर रहता है। मोहब्बत से, रुसवाई से, दोनों से नवाज़ा है तूने, तुम जैसे लोगों में ही तो ऐसा हुनर रहता है। यकीं मैं दिलाऊँ भी तो अपने दिल को किस तरह, जब तेरे जैसा हरजाई इस दिल के अंदर रहता है। ©नीतिश तिवारी।

युद्ध रचाती हो।

जान-जान कहके तुम मेरी जान ले जाती हो, दूर रहकर भी मोहब्बत का एहसास कराती हो। ये बिंदी, ये काजल,  श्रृंगार नहीं हथियार हैं तुम्हारे, इन कातिल अदाओं से मेरे दिल में युद्ध रचाती हो। पलकें झपका के जब नज़रें मिला जाती हो, घायल बनाकर फिर मेरा इलाज़ कर जाती हो। ये तुम्हारे जीने की अदा है या मुझे तड़पाने की, मौसम कोई भी हो बस तुम मुझपे बरस जाती हो। ©नीतिश तिवारी।

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