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Showing posts from May, 2018

Kaun kiska- Zee News BJP ka ya NDTV congress ka?

Kaun kiska- Zee News BJP ka ya NDTV congress ka? जी हाँ दोस्तों, अगर आप आजकल न्यूज़ चैनलों को देखेंगे तो ऐसा ही लगेगा कि सारे चैनल किसी ना किसी पार्टी से संबंध रखते हैं। आइये शुरुआत ज़ी न्यूज़ से ही करते हैं। इस चैनल को देखकर लगता है कि देश का सबसे बड़ा राष्ट्रवादी चैनल बस यही है। इसके सबसे बड़े एंकर में से एक सुधीर चौधरी का अगर बस चले तो ये आज ही पाकिस्तान पर हमला करके उसे भारत में मिला दें। आइये अब बात करते हैं NDTV की। इस चैनल पर हमेशा ये आरोप लगता है कि ये वामपंथियों और कांग्रेसियों का चैनल है। इस चैनल के दो सबसे बड़े चर्चित एंकर बरखा दत्त और रविश कुमार हैं। बरखा मैडम के interview लेने की कला पर अगर आप गौर करेंगे तो पता चलेगा कि दुनियाँ के सारे नकारात्मक और विवादित सवाल सिर्फ इनके दिमाग में ही आते हैं। इन्हें ऐसा लगता है कि विवाद पैदा करना मिडिया का जन्मसिद्ध अधिकार है। अरे भईया TRP का भी मसला है। अब बात करते हैं रविश कुमार की। ये भी बहुत चर्चित रहते हैं। कभी अपने ब्लॉग के लिए तो कभी अपने फेसबुक पोस्ट के लिए। इनको इस बात का सबसे बड़ा मलाल है कि मोदी जी इनको interv

मेंहदी किसी और के नाम की।

चाहे लाख मेहंदी लगा ले किसी और के नाम की, तेरे हांथों की लकीरों से अब मैं नहीं मिटूँगा । नफरतों का दौर तो तुम्हारे शहर में होता होगा, हमारे यहाँ तो आम भी पत्थर से नहीं हाथ से तोड़ते हैं। ©नीतिश तिवारी।

बरस रही हो तुम।

बिखरी ज़ुल्फ़ों में भी सँवर रही हो तुम, शायद मेरे रूप से और निखर रही हो तुम, जब से तुम्हें देखा है सारी प्यास मिट गयी, बिना बादल के भी बरस रही हो तुम। ©नीतिश तिवारी।

जिन्ना-जिन्ना करते हो तुम...

जिन्ना- जिन्ना करते हो तुम, तुमको चाहिए आज़ादी, भगत सिंह जो फाँसी पर चढ़े वो बोलो फिर क्या थी। देश में रहकर देशद्रोही बनते फिरते हो तुम, ये काम किसी और के इशारे पर करते हो तुम। सालों पहले देश बँट गया तुम जैसे लोगों के कारण, इस बार देश नहीं बंटेगा चाहे कर लो कितने जतन। पढ़ने की जगह पर तुम सिर्फ नारे लगाने जाते हो, भारत में रहकर तुम क्या पाकिस्तान का खाते हो। कितना भी तुम चिल्ला लो, इन नारों में वो बात नहीं, बाहरी आदमी देश बँटवा दे उसकी अब औकात नहीं। ©नीतिश तिवारी।

एहतराम किया।

तुम्हारी खामोशियों का एहतराम किया है मैंने, अपनी ग़ज़ल को भी तेरे नाम किया है मैंने। अपनी पलकों से आँसू को निकलने ना दिया, अपने जज़्बात को तेरा गुलाम किया है मैंने। यूँ तो बर्बाद हो गया मैं तेरी मोहब्बत में लेकिन, फ़कीरी में भी दाना-पानी का इंतज़ाम किया है मैंने। ©नीतिश तिवारी।

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