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Showing posts from January, 2015

उसी गली में मेरा भी घर है।

नज़र नज़र में तेरा असर है, बाकी सब तो बेअसर है , तुझे मैं देखूँ जिस गली में, उसी गली में मेरा भी घर है।  सुरूर तो मोहब्बत का था , कसूर तो शरारत का था , फिर भी अंजाम तक ना पहुँच पाया , क्योंकि बेक़सूर मैं अपनी हरकत से था।  © नीतीश तिवारी। 

Dream Come True—Become C.E.O.

Yes it’s like a dream come true for me. I have lived with this dream for last eight years when I was in 12 th standard. At that time when I used to discuss with my friends about becoming a C.E.O. one day they laughed. I have not made any type of effort to prove them wrong but it was just my passion to become Chief Executive Officer of a company. It’s something that I wanted to achieve in my life so deliberately. Some people are saying that why C.E.O.? why not Chairman or Director? The answer of this question is that I love the title C.E.O. and it also sounds fantastic in comparison to Chairman or Director. As I was away from my home for last ten years, I have learnt a lot whether it’s from education, society, relationships and all that. I think that education is the most powerful weapon that can reform our society. For last seven months I have been associated with teaching and reality is that I am enjoying my profession.  That’s why I have decided to

अगर तुम ना होती तो...

अगर तुम ना होती तो... ये गुलाब ना होता,ये शबाब ना होता. ये झरने ना होते, ये भँवरे  ना होते, ये नदियाँ ना होती, ये वादियाँ ना होती, अगर तुम ना होती तो... ये उलझन ना होता, ये तड़पन ना होता. ये खुमारी ना होती, ये बेकरारी ना होती, ये दीवानगी ना होती,ये मस्तानगी  ना होती, अगर तुम ना होती तो... ये मोहब्बत ना होती, ये इबादत ना होती. ये साँसे ना होती,ये धड़कन ना होती, ये मिलन ना होता,ये बिछड़न  ना होता, अगर तुम ना होती तो... तो मैं ना होता,मेरा वज़ूद ना होता. नीतीश तिवारी

ये तेरा रूप, ये तेरा श्रृंगार .

ये तेरा रूप ही तो है, जिसे मैं बार-बार निहारता हूँ.  तेरे चेहरे की ये लालिमा, जब मेरे आँखों मे ओझल हो जाती हैं।  तो हर बार बहक जाता हूँ मैं, एक नये अरमान के लिए, एक खूबसूरत अंज़ाम की तरफ. और महसूस करता हूँ मैं, तेरे बदन की खुश्बू जो मदहोश कर देती है मुझे, एक पल,हर पल ,हर लम्हा. और बेकरार रहता हूँ मैं, तुझे पाने के लिए, तुझे हर बार निहारने के लिए. नीतीश तिवारी

'तुम भी अच्छे थे '।

भरोसा रूह का होता तो मोहब्बत मुकम्मल होता , पर उसने दीवानगी भी दिखायी तो सिर्फ जिस्म के खातिर।  क़त्ल करने की अदा  से  बखूबी वाकिफ था वो, जाते हुए मुस्कुरा कर कह दिया - 'तुम भी अच्छे थे '।   नीतीश  तिवारी 

Happy New Year 2015

आज मेरे ब्लॉग को पूरे दो साल हो गये हैं . 2014 में अत्यधिक व्यस्तता की वजह से कुछ कम लिख पाया. इस वर्ष कोशिश करूँगा की ज़्यादा से ज़्यादा रचनाएँ आप सभी तक पहुँचा सकूँ . आप सभी को नववर्ष 2015 की हार्दिक शुभकामनाएँ. नववर्ष मंगलमय हो!                                खाली वो मंज़र होगा,                                बेजान वो बंज़र होगा,                              खुदा की गर रहमत ना हुई,                               तो हैरान वो समंदर होगा.                              पत्तों में हरियाली ना होगी,                             ज़िंदगी में खुशहाली ना होगी,                                 खुदा की गर रहमत ना हुई,                             तो तेरे चेहरे पे ये लाली ना होगी.                                    शुभकामनाओं के साथ .                                           नीतीश तिवारी

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