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Showing posts from December, 2013

अलविदा 2013

अब भी आरजू है तुझे सँवरने  की, पर वक़्त को आदत नही है ठहरने की , अब भी चाहत  है मेरी तड़पने  की , तेरी हर एक साँसों में महकने की, पलकों के साये में बिछड़ने की  उस हसीन दारिया में उतरने की, खूबसूरत लम्हों को क़ैद करने की,  और फिर से हद से गुजरने की. अलविदा 2013....

Bye Bye To Student Life...Welcome To Professional.

This month was so hectic and stressful because I was busy in semester examination ...thank God its ended today. Now, no more classes and no more assignments because fifth semester has ended and now we have project training in last sem. I am feeling happy as examination finished and also feeling sad as student life is come to an end. From last 20 years the journey of my student life has been wonderful. I would like to share some memorable moments of my student life with you. The journey started twenty year back wen I got enrolled in first standard in primary school which was situated in my village. As a child and as a student I used to be  very shy but an intelligent boy. My grandfather used to be a teacher and my father is also a teacher and let me tell you one interesting fact that in my village, there is at least one teacher in every family. So you can say that education is in my blood and I have learnt  a lot throughout my life by living in such an educational so

आज फिर खयाल आया।

आज फिर खयाल आया कि कुछ पैगाम लिखूँ , लब पर तेरा नाम लिखूँ  या तुझे अपनी जान लिखूँ।  आज फिर खयाल आया कि कुछ सौगात लिखूँ , नींदों में बसे ख्वाब लिखूँ या तेरी कही हर बात लिखूँ।  आज फिर खयाल आया कि कुछ तहरीर  लिखूँ , परदे के पीछे कि तस्वीर लिखूँ  या अपनी रूठी तकदीर लिखूँ।  आज फिर खयाल आया कि कुछ अंज़ाम  लिखूँ , उस महफ़िल की वो ज़ाम लिखूँ  या दुनिया का इल्ज़ाम लिखूँ। 

मोहब्बत हुए ज़माना गुज़र गया .

                                            काबिल-ए-तारीफ थी तेरी वफ़ा-ए-मोहब्बत,                       सबको आबाद करके हमे बर्बाद किया.                      मत पूछो मुझसे तरकीब आज़माने की,                      उनसे मोहब्बत हुए ज़माना गुज़र गया .                     उस बरसात की रात का भी क्या सुरूर था,                     वो लिपटे जिस्म से थे और मेरा रूह उनसे दूर था.                    बरसों से निगाह थी उसकी मेरे दिल के खजाने पर,                    वो लूटता चला गया और मैं तन्हा खड़ा रहा.

कश्मकश ज़िंदगी की।

कोई रूठे कैसे , कोई मनाए कैसे , कोई बिछड़े कैसे , कोई भुलाए कैसे।  एक प्यारी सी हँसी , एक नाज़ुक सी अदा , एक भोला सा चेहरा , एक चाँद सा मुखड़ा।  कोई छुपाए कैसे , कोई दिखाए कैसे , तेरे गीत ग़ज़ल के , कोई गुनगुनाए कैसे।  एक माटी कि मूरत , एक भोली सी सूरत , एक नन्ही सी गुड़िया , एक सोने कि चिड़िया।  कोई आजमाए कैसे , कोई सताए कैसे , अपने दिल कि बात , कोई  बताए कैसे। 

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