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Showing posts from November, 2013

फिर तेरी याद आई.

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पहले हिमाकत की थी, अब फरियाद करता हूँ, जा तुझे मैं अब इस, पिंजरे से आज़ाद करता हूँ, उन आँखों में मत बसना , जो गंगा यमुना बहाती हैं, उन साँसों में मत घुलना, जो तेरी आहट से डर जाती है. जब दीप जला अंधकार मिटा, फिर भी ना गया तेरा साया, जब सावन की हरियाली आई, तब कोई अपना हुआ पराया. ये मेरी बेबसी है या कमज़ोरी, मिलन की चाहत अब भी है अधूरी, आरज़ू दिल की दिल में दबने लगी, अश्कों की धुन्ध फिर से सजने लगी. ©नीतिश तिवारी।

कुछ डायरी के पन्नों से

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मत छीन सुकून मेरा इन आँखों से, तेरे दीदार का सिर्फ़ ये ही एक सहारा है . अगर अंज़ाम की फ़िक्र होती तो मोहब्बत ना करते, हमें तो तेरे आगाज़ ने ही तन्हा बना दिया . उलफत के वादों को तुमने निभाया ही नही, और कहते हो की तेरा ज़िक्र आया ही नही, गैरों का दामन थामते रहे ज़िंदगी भर, और शिकायत है कि तुमने अपनाया ही नही. तेरी आशिकी ने मेरी तबीयत बिगाड़ दी है , किससे दवा लूँ या किसकी दुआ लूँ पता नही.

एक बरसात साथ रहती है।

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भटकते राहों में भी मंज़िल की तलाश रहती है. सूखे दरिया में भी एक पानी की प्यास रहती है. सूनी गलियों में भी उसके आने की आस रहती है. भीगी पलकों में भी मुस्कुराने की चाह रहती है. तूफ़ानों में भी चिरागों के जलने की आस रहती है. इस तन्हाई में भी एक महफ़िल की तलाश रहती है. होठों से कही तेरी हर बात याद रहती है. इन आँसूओं की एक बरसात साथ रहती है.

तुम जो बसे परदेश पिया.

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तुम जो बसे परदेश पिया, मैं हूँ अपने देश पिया, जब याद तुम्हारी आती है, मेरे जिया को तड़पाती है . तेरे नाम की खुश्बू जब-जब, मेरे साँसों को महकाती है, रोम -रोम पुलकित हो जाता , जब याद तुम्हारी आती है. मेरे आँखों के काजल में तुम, मेरे बातों के हलचल में तुम, पर हर बार मैं यही सोचती हूँ, क्यूँ साथ नही अब मेरे तुम. अपनी खामोशी को क़ैद किए,    तुम्हारे आगोश में लिपट जाती हूँ, मैं कैसे बताऊँ तुम्हे साँवरिया, तुम बिन कैसे मैं जी पाती हूँ.

तेरी मोहब्बत ने शायर बना दिया।

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Pic credit: Google.      हमें आदत थी पत्थर के मकानों में ठहरने की, कभी एहसास ही नहीं हुआ कि दिल सीसे का बना है।       हमारी मोहब्बत का बस इतना सा पैगाम था,      वक़्त -बे -वक़्त उसका मुझ पर ही इलज़ाम था।    ज़माना यूँ तो नाराज़ नहीं था मुझसे पहले कभी,  एक तेरी मोहब्बत के खातिर आज सबके बैरी हो गए।       न जाने  कौन सी दवा दे गया था वो हक़ीम,    न ही वो पास आती है, न ही ये मर्ज़  दूर जाता है।      अब मेरे कलम कि दिवानगी रोके नहीं रुकती,         इस मोहब्बत ने हमें भी शायर बना दिया।  ©नीतिश तिवारी।

एक चाँद नज़र आता है।

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जब चाँद छुप जाता है बादल  में , तब तेरे चहरे की चमक देती  है रौशनी।  जब रात गुजरती है तेरी बाँहों में , तब तेरे बदन कि खुशबू देती है ज़िंदगी।  जब शोर होता है सन्नाटों में , तब तेरी हर एक धड़कन देती है राहत।  जब कोई नहीं होता है कमरे में , तब तेरी हर एक साँस कि होती है आहट।  जब इतने सारे रंग यहाँ , तब चैन कहाँ मिल पाता है।  तेरी भुली बिसरी बातों से अब , वक़्त कहाँ गुजर पाता है।  जब जज्बातों का सैलाब उमड़ कर आता है , तब तेरा हर वो ख्वाब नज़र आता है।  जब सजती है तन्हाई कि वो महफ़िल , तब फिर से मुझे एक चाँद नज़र आता है। 

मोहब्बत साथ रहता है।

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तूफानों में भी एक मंज़र याद रहता है, इन आँसूओं का समंदर साथ रहता है।  उभरते हुए इन ज़ख्मों के  साथ , तेरा दिया हुआ हर सितम याद रहता है।  कोशिश तो कि थी हमने तुझे भुलाने कि , पर हर जाम में तेरा अक्स  साथ रहता है।  हर बार पूछते हैं लोग इस तन्हा दिल से, कौन है वो खुशनसीब जो तेरे साथ रहता है।  इस ज़िंदगी और ज़माने से कोई शिकायत नहीं , सुकून तो है कि तेरा मोहब्बत साथ रहता है।  प्यार के साथ  आपका नीतिश।  

हम भी हैं शायर

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मचलता है जिस्म तो मिलता है रूह को  सुकून , इश्क़ वो दरिया है जिसमे गोते लगाते  हैं सभी।  हर बार चला देता है वो अपने तरकश का तीर , कम्बख्त मेरा ही दिल होता है उसके निशाने पर।  आ जाना मेरे ख्वाबों में आज भी , दीदार कि तलब एक बार फिर जगी है।  अपनी आँसुओं से मिटा देते तेरी तस्वीर को , पर कम्बख्त निकलता भी नहीं तेरी याद के बिना।