Pic credit: Google. तेरे उड़ते हुए खयालों का मैं एक परिंदा हूँ, छत पर निकल कर देख, मैं अभी ज़िंदा हूँ। कोई नज़राना तो पेश कर, मै…
Read moreअगर शब्दों में पिरो दूँ तुम्हें तो मेरी अमृता हो तुम, इज़हार कैसे करूँ, चुनावी आचार संहिता हो तुम। इंतज़ार की घड़ी खत्म हुई अब ऐत…
Read moreमोहब्बत है तो मोहब्बत की शुरूआत कीजिए, शिकायत है पर थोड़ी सी तो बात कीजिए, कब तक रूठ कर यूँ बैठी रहेंगी आप, चलिए ना, मोहब्बत की बरसात …
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