Sukoon
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दिल को सुकून कभी कभी नहीं मिलता। फिर वो एक अनंत काल की यात्रा पर चल जाता है, सुकून की तलाश में। उसकी यात्रा में कोई साथी नहीं होता। शायद उसे डर लगा रहता कि कोई उसके सुकून में बाधा ना डाल दे। कोई ये ना कहने लगे कि मेरी वजह से तुम्हे सुकून मिला है। कोई अपना हक़ ना जताने लगे। यही तो इस दुनिया का दस्तूर है। छोटी छोटी बातों को लोग बढ़ा चढ़ाकर बोलते है। तिल का ताड़ बना देते हैं। दो लम्हा साथ क्या निभाया उसे सदियों का साथ बताने लगते हैं। वो ऐसा व्यवहार करते हैं मानों उनके बिना ना सुबह होगी और ना ही शाम। 

पर दिल को तो सुकून चाहिए और वो मिलता है अनंत काल की यात्रा पर। सुकून मिलता है निर्वात में। 


©नीतिश तिवारी।