Saturday, November 28, 2020

तूफ़ानों का रुख़ मोड़ देता हूँ।

 





लोग जब ख़ैरियत तक नहीं पूछते मेरी,
खुद से ही मोहब्बत कर लेता हूँ।
जलते दीये को जब आँधियों का डर होता है,
मैं तूफ़ानों का रुख मोड़ देता हूँ।

Log jab khairiyat tak nahi poochhte meri,
Khud se hi mohabbat kar leta hoon,
Jalte diye ko jab aandhiyon se dar hota hai,
Main toofan ka rukh mod deta hoon.

©नीतिश तिवारी।



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