Night shayari and poem
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वो रात नहीं गुजरी
वो दिन भी नहीं ढला है
वो आदमी तो अच्छा था
लोग ही कहते बुरा भला हैं।
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मेरे हिस्से में आएगी
तो बताऊँगा,
वो सुकून है साहब
सबके पास नहीं आती।
नींद आ गयी तो 
सो जाऊँगा,
ये रात है साहब,
यूँ ही नहीं गुजर जाती।
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कुछ दिन की बातें
कुछ रात के तराने
मैंने लिखे अपने
हालात के अफ़साने
तुम्हें फुर्सत मिले तो
कभी पढ़ भी लेना
कैसे हुए थे हम
तेरे इश्क़ में दिवाने।

©नीतिश तिवारी।