Romantic poem

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सम्बन्ध विच्छेद
करोगे तुम तो
प्रेम प्रगाढ़
कैसे होगा।

पूनम की रात
आ गयी है
ये जिस्म 
एक जान
कैसे होगा।

तुम्हें जो भी
शिकायत है
उसे टाल दो
थोड़ी देर को।

ये शब आज
बर्बाद ना करो
रुक जाने दो
घड़ी के फेर को।

हठ लगाए बैठे हो
ना जाने कौन सी
ज़ुल्म-ओ-सितम की
मैं उसे भी सुन लूँगा
पर ये घड़ी है
सुखद मिलन की।

कितनी सदियाँ बीत गयी
उसके बाद तो आये हो
नखरे भी तेरे सह लूँगा
क्योंकि तुम ही
 रूह में समाये हो।

©नीतिश तिवारी।