Tumhe pana chahta hu


























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भौतिक संसाधनों से परे,
नाम और शोहरत की 
भीड़ में भी मैं
सिर्फ तुम्हें तलाश
करता हूँ।

इस निरर्थक जीवन में
सिर्फ एक काम 
जो सार्थक लगता है
तुम्हें तलाश करना।

वही बातें वही रातें
चंद मुलाक़ातें
फिर से लाना चाहता हूँ
तुम्हें ढूँढना चाहता हूँ
तुम्हें पाना चाहता हूँ।

©नीतिश तिवारी।