Wednesday, 31 July 2019

ये मौसम और प्यार।
























Pic courtesy: Pinterest.




तुमने कुछ नहीं कहा, ये बरसात भी थम गई। तुम्हारे जाने के बाद अक्सर सोंचता हूँ कि प्यार का मौसम कौन सा था। प्यार मौजूद भी था या बेमौसम बारिश की तरह आया और चला गया। कितनी कहानियों के किरदार सजा कर रखे थे मैंने। पर तुम्हारे जाने के बाद सारे किरदार दम तोड़ने लगे हैं। किताबों पर धूल पड़ गयी है, बगीचों में फूल खत्म हो गए हैं। पर जाते जाते एक वादा करके जाओ। वादा ये की तुम आओगी फिर से। उन्हीं कहानियों के किरदार को ज़िंदा करने के लिए। मुझे ज़िंदा करने के लिए।

©नीतिश तिवारी।

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Monday, 29 July 2019

Shayari aur tera pyar.

























Pic credit : Pinterest.






शायरी में दर्द लिखूँ, ग़ज़ल में कयामत और कहानी में तेरा किरदार,
बहुत फरमाइश आ रही है, लो ज़िक्र कर ही देता हूँ, तेरा प्यार।

Shayari mein dard likhoon, gazal mein qayamat aur kahani mein tera kirdaar,
Bahut farmaish aa rahi hai, lo zikar kar hi deta hoon, tera pyar.

फूलों से दोस्ती, बगिया से प्यार, लहरों से इश्क़ , समंदर को सलाम, वो भी एक मौसम था।
काँटों से दोस्ती, पतझड़ से प्यार, सूखे से इश्क़, बंजर को सलाम, ये भी एक मौसम है।

Foolon se dosti, bagiya se pyar, lahron se ishq, samandar ko salaam, wo bhi ek mausam tha.
Kaanton se dosti, patjhad se pyar, sookhe se ishq, banjar ko salam, ye bhi ek mausam hai.

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 28 July 2019

तन्हाई का इनाम।

















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वस्ल से पहले क्यों हिज़्र का फ़रमान दे दिया,
मुझको विदा किया और रास्ते का सामान दे दिया,
तुम तो कहते थे कि कीमती है हमारी मोहब्बत,
फिर वक़्त से पहले क्यों तन्हाई का इनाम दे दिया।

Wasl se pahle kyun hizr ka farmaan de diya,
Mujhko vida kiya aur raste ka saaman de diya,
Tum toh kahte the ki kimti hai humari mohabbat,
Fir waqt se pahle kyun tanhai ka inaam de diya.

नीतिश तिवारी।







Friday, 26 July 2019

चंद्रयान और तेरी मोहब्बत।


























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चंद्रयान और तेरी मोहब्बत।

चंद्रयान लॉन्च
हो गया है
तुम भी साथ गयी
हो क्या
नहीं मैं इसलिए
पूछ रहा हूँ
क्योंकि अभी तो
चंद्रयान पृथ्वी 
की पहली 
कक्षा में ही
स्थापित हुआ है
और अभी से ही
उस पर तेरा नाम
देख रहा हूँ
अच्छा तो तुम 
यहीं हो
लगता है तुमने
मेरे नाम की
मेंहदी लगाई है।

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 23 July 2019

ग़ज़ल- चरागों का एहतराम किया।

























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दिवाली थी तो चरागों का एहतराम किया,
दिल अपने जलाए और तेरे नाम किया।

खुदगर्ज़ी का शौक तो तुमने पाला था,
हमने तो अपना वक़्त भी तेरे नाम किया।

साँस लेने में हमें अब तकलीफ़ होती है,
जब से इन हवाओं को तेरा गुलाम किया।

दर्द देने की फितरत से तू बाज ना आया,
इसलिए हमने मोहब्बत सरेआम किया।

अंज़ाम-ए-वफ़ा क्या होता इस कहानी का,
खंज़र ले आया और मौत का इंतज़ाम किया।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 21 July 2019

Reason behind selective propaganda to defame the Narendra Modi government.

Narendra Modi prime minister























Reason behind selective propaganda to defame the Narendra Modi government.

जी हाँ दोस्तों, आज मैं बात करूँगा नरेंद्र मोदी सरकार को बदनाम करने वाली साजिश के बारे में। वही साजिश जो 2014 से चली आ रही है इस तर्क के साथ कि पहले भारत में लोकतंत्र भलीभांति फल फूल रहा था। लेकिन 2014 के बाद लोकतंत्र खतरे में आ गया।

पिछले कुछ वर्षों में हिंदुस्तान में एक नया ट्रेंड शुरू हो गया है। इस ट्रेंड को शुरू करने वाले हैं so called intellectuals. मैं आगे आपको कुछ घटनाएँ बताऊँगा जिससे कि इनका पाखंड उजागर हो जाएगा।

Intolerance के बाद अब एक और नए शब्द का अवतरण हुआ है और उसका नाम है Mob lynching. कहा ये जा रहा कि मुसलमान और दलित इस देश में सुरक्षित नहीं है। पर ये कोई नहीं बताएगा कि अगर मुसलमान इस देश में सुरक्षित नहीं हैं तो फिर रोहंगिया मुसलमानों को अवैध तरीके से बसाने और शरण देने की पैरवी क्यों की जा रही थी।

कुछ दिनों पहले झारखण्ड की घटना को इतना तूल दिया गया और कहा गया कि तबरेज़ जो एक चोरी करता हुआ पकड़ा गया था, उसे भीड़ ने मार दिया। वो भी जय श्री राम बुलवाकर। वो बात अलग है कि मौत का कारण डॉक्टरों ने कुछ और बताया था। अगर यही तबरेज़ मुसलमान ना होकर कोई और होता तो शायद इतनी चर्चा नहीं होती। इसका प्रूफ ये है कि जब भीड़ ने मथुरा के लस्सी वाले को पैसे मांगने पर मार दिया तब कोई कुछ नहीं बोला। इन so called intellectuals के मुंह में दही जम गया था जब दिल्ली में डॉक्टर नारंग की हत्या हुई। ध्रुव त्यागी के मामले में तो इनको सांप सूंघ गया था। अगर पीड़ित मुसलमान या दलित हो तो इनको दिन में तारे दिखने लगते हैं लेकिन अगर आरोपी मुसलमान हो तो फेविकोल का पूरा स्टॉक खत्म हो जाता है और इनके होंठ सील जाते हैं।




कठुआ में आसिफ़ा के साथ जो हुआ वो बहुत बुरा हुआ। लेकिन चूंकि उसमें आरोपी हिन्दू थे तो पूरे हिन्दू धर्म को बदनाम कर दिया गया। देवी स्थान को बदनाम कर दिया गया। बॉलीवुड की महान आदर्शवादी अभिनेत्रियों ने तो तख्ती पर लिखकर पूरे हिंदुस्तान और हिन्दू धर्म को बदनाम करने की साजिश करने लगीं। लेकिन ट्विंकल शर्मा के केस में इन्ही आदर्शवादी अभिनेत्रियों की तख्ती गायब थी, शायद लिखने के लिए स्याही खत्म हो गया होगा।

जब कश्मीर में लाखों हिंदुओं को भगा दिया जाता है तब लोकतंत्र खतरे में नहीं आता। लोकतंत्र तब भी खतरे में नहीं आता जब दिल्ली में हजारों सिखों का कत्ल कर दिया जाता है। क्योंकि उस समय इनकी मर्जी की सरकार थी। अब देश के जनता की मर्जी की सरकार है तो सबको मिर्ची लग रही है। आज कुछ लोगों ने ये तय कर लिया है कि किस मामले में बोलना है और किसमे नहीं। वो आरोपी और पीड़ित की जात और धर्म देखकर अपना प्रोपेगेंडा चलाते हैं।

लेकिन देश की जनता समझदार है और इन सबको सबक सिखाने में यकीन रखती है। झूठ कितना भी शक्तिशाली हो लेकिन वो सच को कमजोर नहीं कर सकता। हमें अपनी संस्कृति और सभ्यता पर गर्व करना होगा। इन तथाकथित बुद्धिजीवी लोगों को हराने के लिए बस इतना ही काफी है।

जय भारत। जय हिन्द।



© नीतिश तिवारी।
twitter: @nitishpoet



Friday, 19 July 2019

Kahin der na ho jaye.

























Pic credit : pinterest.






तू जो मुस्कुराए तो मौसम में बहार आ जाए,
बंजर जमीन में भी बरखा की फुहार आ जाए,
मोहब्बत गर है तो फिर इज़हार कर दे,
कहीं देर ना हो जाए और  इतवार आ जाए।

Tu jo muskuraye toh mausam mein bahar aa jaye,
Banjar zameen mein bhi barkha ki gujaar aa jaye,
Mohabbat gar hai toh for izhaar kar de,
Kahin der na ho jaye aur it waar aa jaye.

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 16 July 2019

बेवफ़ाई ने मशहूर कर दिया।

















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मेरे इश्क़ ने तुम्हें जन्नत का हूर कर दिया,
जमाने भर के सामने हमें मजबूर कर दिया,
अफ़साना अंजाम तक ना पहुँचा तो क्या,
तुम्हारी बेवफाई ने मुझे मशहूर कर दिया।

Mere ishq ne tumhen jannat ka hoor kat diya,
Jamane bhar ke samne humen majboor kar diya,
Afsana anzaam tak naa pahuncha to kya,
Tumhari bewfai ne mujhe mashhoor kar diya.

©नीतिश तिवारी।

Saturday, 13 July 2019

कविता- बरसात और मुलाकात ।




















वो आषाढ़ का पहला दिन था 
मगर मैं अज्ञात उनसे मिलने चला 
टिक-टिकी 4:45 की ओर इशारा कर रही थी 
घनघोर घटा उमड़ रहे थे 
मानो उनका भी मिलन महीनों बाद आज ही होने वाला था 
वैसे मैं भी महीनों बाद ही मिलने वाला था
इंतज़ार के लम्हे तन्हाईयों के आगोश में लिपटे मुझसे परिचय कर रहे थे 
टिक - टिकी के गति से तेज धक-धक की बेचैन करने वाली आवाज सुनाई देने लगी जैसे ही दूर से उनकी आहटों का एहसास हुआ 
रोम रोम पुलकित हो उठा
तभी नभ से एक बूंद मेरे बालों को चूमता हुआ ललाट तक आ पहुँचा 
मानो जैसे वहाँ भी मिलन बस होने ही वाला था 
वो मेरे और नज़दीक आ रही थी 
मगर मैं एक ही जगह अपने पाँव को अंगद की भाती जमाये खड़ा था 
मेरे हाथों में जो गुलाब की पंखुड़ियों का समूह था वो सतह को चूमने वाला ही था तभी एक और बूंद मेरे हाथों को अपना एहसास करने में सफल रहा और पंखुड़ियों के समूह को सतह पर बिखरने से रोक दिया 
अब वो मेरे करीब थी और मैं खुशी घबराहट और हिचकिचाहट से अपना परिचय करा रहा था 
तभी उन्होंने मेरे हाथों से पंखुड़ियों का गुच्छा लिया और अचानक से बादल भी टूट पड़े 
वो आषाढ़ का पहला दिन था ।।

ये भी पढ़िए: इश्क़ का ठिकाना।

©शांडिल्य मनीष तिवारी।

Tuesday, 9 July 2019

Zindgi ishq aur tum.


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करते रहे हम उम्र भर ज़िंदगी से शिकवा,
फिर मौत से सामना हुआ और ज़िंदगी रूठ गई।

Karte rahe hum umr bhar zindgi se shikwa,
Fir maut se saamna hua aur zindgi rooth gayi.

सफर में हमसफर मिले और ज़िंदगी सँवर जाए,
ऐसा हसीन सपना मैंने देखा था एक रोज।

Safar mein humsafar mile aur zindgi sanwar jaye,
Aisa haseen sapna maine dekha tha ek roj.

©नीतिश तिवारी।





Sunday, 7 July 2019

लघुकथा- ट्रेन का सफर।

















लघुकथा- ट्रेन का सफर।

ट्रेन खुले हुए दो घंटे बीत चुके थे। अभी रात भर का सफर बाकी था। वो सामने वाली सीट पर पिछले दो घंटे से बैठकर किताब पढ़ रही थी। कभी कभी हमारी नजरें मिल जाती थी। जब आप एक लेखक हों और आपके सामने कोई किताब पढ़ रही हो तो बात करने की उत्सुकता तो हो ही जाती है। 

हिम्मत करके मैंने पूछ ही लिया, " बड़े ध्यान से आप घंटों से ये किताब पढ़ रही हैं। किस बारे में है ये किताब?"
पहले तो उसने हैरानी से मुझे देखा। फिर जवाब दिया, "कुछ खास नहीं लेकिन आप क्यों पूछ रहे हैं?"
मैंने कहा," मैं भी एक लेखक हूँ और अपनी पहली नॉवेल लिख रहा हूँ।"
फिर उसने मुझे बधाई दी। 

अगले कुछ घंटों में हमलोग काफी घुल मिल गए थे। डिनर भी हमने साथ में किया। चूंकि उसे पहले उतरना था इसलिए मुझे सोने से पहले आगे की बात करनी थी। मैंने कहा, "आपने अपना नाम नहीं बताया अभी तक।"
उसने कहा, "मैं सिमरन और आप?"
"जी, मैं राज।"
वो थोड़ी देर के लिए खामोश हो गयी। शायद DDLJ का सीन याद कर रही होगी। 
अगले ही पल उसकी खामोशी को तोड़ते हुए मैंने कहा,"आपने हमारी दोस्ती की किताब में पहला चैप्टर तो लिख दिया। लेकिन हम इस किताब को पूरा करना चाहते हैं।"  वो मेरा इशारा समझ गयी थी। उसने अपनी पर्स से एक पन्ना निकाला उस पर अपना नंबर लिखा और मुझे देते हुए कहा, " ये लीजिये, ये आपको आपकी किताब पूरी करने में मदद करेगा।" इतना कहकर उसने गुड नाईट बोला और सोने के लिए चली गयी।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 3 July 2019

मोहब्बत का हिसाब मिलेगा।

























Pic credit : Pinterest.



खोखले वादे करने का तुम्हें खिताब मिलेगा,
मोहब्बत में सितम जो किए उसका हिसाब मिलेगा,
मेरी तड़प देखकर अब तुम्हें हैरानी हो रही है,
परेशान मत हो, एक दिन इसका भी जवाब मिलेगा।

Khokhle wade karne ka tumhen khitab milega,
Mohabbat mein sitam jo kiye uska hisab milega,
Meri tadap dekhkar ab tumhen hairani ho rahi hai,
Pareshan mat ho, ek din iska bhi jawab milega.

©नीतिश तिवारी।