Thursday, 30 May 2019

Shayari- Mujhe ishq hai tumse.













Pic credit: Google.










मुझे इश्क़ है तुमसे, मैं इसका इज़हार करूँगा,
मोहब्बत के रश्म के लिए खुद को तैयार करूँगा,
खुद को कभी अकेला मत समझना तुम,
इस जनम में क्या, हर जनम में तुम्हें प्यार करूँगा।

Mujhe ishq hai tumse, main iska izhaar karunga,
Mohabbat ke rasm ke liye khud ko taiyaar karunga,
Khud ko kabhi akela mat samjhna tum,
Is janam mein kya, har janam mein tumhe pyar karunga.

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 26 May 2019

कविता- मोदी नए भारत की गाथा लिखेंगे।





















अब भर दिया हुंकार है,
ये जीत नहीं ललकार है,
कोई नहीं है टक्कर में,
विपक्ष पर करारा प्रहार है।

लोकतंत्र की जीत हुई है,
नए भारत का निर्माण होगा,
राष्ट्रवाद अब विजय हुआ है,
जनता के भरोसे का सम्मान होगा।

जन कल्याण की योजनाओं से,
पूरा बहुमत फिर से आया है,
बढ़ चढ़कर मतदान किया है,
तभी तो मोदी फिर से आया है।

राष्ट्र को सर्वप्रथम रखकर,
विकास की नई परिभाषा लिखेंगे,
जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप,
मोदी नए भारत की गाथा लिखेंगे।

©नीतिश तिवारी।


Thursday, 23 May 2019

Narendra Modi registered historic victory in Lok Sabha election 2019.

























आखिरकार वो पल आ ही गया जिसका सबको इंतज़ार था। चुनावी नतीजे घोषित हो चुके हैं। मोदी जी पुनः एक बार प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। उनको जीत की बधाई। सबका साथ और सबका विकास के नारे पर चलते हुए मोदी जी ने 2014 के 'मोदी लहर' को 'मोदी सुनामी' में तब्दील कर दिया है। 

इस बात से आज किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए कि मोदी जी एक ब्रांड बन चुके हैं और हर भारतीय को गर्व होना चाहिए कि हम ऐसे युग में हैं जहाँ पर नरेंद्र मोदी जैसे यशश्वी नेता हमारे प्रधानमंत्री हैं। भारत में 21वीं सदी के जननेता नरेंद्र मोदी जी बन चुके हैं। जिस तरह से सभी विपक्षी दल झूठी एकता का प्रदर्शन करने पर अमादा थे, नरेंद्र मोदी की इस जीत से देश ने एक ही झटके मे 20 प्रधानमंत्री खो दिए।
UP में महागठबंधन की हालत का सीधा मतलब है कि जातिगत राजनीति वहाँ काम नहीं आयी।  मुझे लगता है कि जनता ने जाति से ऊपर उठकर भारत के नागरिक के रूप में वोट दिया है। अमित शाह का बूथ मैनेजमेंट और नए युवा नेताओं को मौका देना भी एक बड़ा कारण रहा।

भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं और देश के नागरिकों को बधाई। उम्मीद है कि नई सरकार जनभावनाओं का खयाल रखते हुए जनता की उम्मीदों पर खरी उतरेगी और दुनिया में देश का नाम रौशन करेगी।

भारत माता की जय।

©नीतिश तिवारी।


Monday, 20 May 2019

मैं मौजूद रहूँगा।













Pic credit : Pinterest.











मैं तेरे शहर में,
दिन के आठों पहर में,
ग़ज़ल की बहर में,
मौजूद रहूँगा।

तुम प्यार मुझसे जरूर करना,
सीप से मोती जरूर चुनना,
ख़्वाबों में सिर्फ मुझे देखना,
मैं उन ख़्वाबों में,
मौजूद रहूँगा।

ये भी पढ़िए: काश तुम।

©नीतिश तिवारी।

Thursday, 16 May 2019

फर्क नहीं पड़ता।













Image courtesy: pinterest.








मुझे फर्क नहीं पड़ता
कि तुम मुझे मुस्कुरा
कर देखती हो
या देखकर मुस्कुराती हो
मुझे तो बस तुम्हारे
होठों पर हँसी 
देखनी है।

मुझे फर्क नहीं पड़ता
कि तुम मुझे प्यार
करती हो या नहीं
मुझे तो बस तुम्हारे
साथ रहने से 
सुकून मिलता है।

मुझे फर्क नहीं पड़ता
कि लोग मुझे 
एक तरफा प्यार 
में पागल आशिक़
कहते हैं
बस एक भरोसा
है कि एक दिन
ये प्यार दोनों
तरफ से होगा।

इसे भी पढ़िए: अधूरा इश्क़, पूरी मोहब्बत और तुम।

©नीतिश तिवारी।


Monday, 13 May 2019

बचपन की बातें।

Childhood games of 90s kids








Pic credit : Pinterest.




रेत पर महल बनाए,
कागज़ के नाव चलाए,
बचपन की बाते थीं जनाब,
काश वो दिन फिर लौट आए।

Ret par mahal banaye,
Kagaz ke naam chalaye,
Bachpan ki wo baaten thi janab,
Kaash wo din fir laut aaye.

ये भी पढ़िए : शाहरुख खान के लिए मेरा पत्र।

©नीतिश तिवारी।






Thursday, 9 May 2019

फैसला गलत हो गया।














Pic credit : Pinterest.







मोहब्बत पाने को हमने खूब तरतीब किया,
बस यही एक फैसला हमारा गलत हो गया।

Mohabbat pane ko humne khoob tarteeb kiya,
Bas yahi ek faisla humara galat ho gaya.

गुनाहों की सज़ा दे पर थोड़ा कद्र-ए-मोहब्बत भी कर,
धड़कनों को जिस्म से अलग करके  ज़िंदा कैसे रहेगा।

Gunahon ki saza de par thoda kadr-e-mohabbat bhi kar,
Dhadkano ko jism se alag karke zinda kaise rahega.

तरतीब- Arrangement.

©नीतिश तिवारी।

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Tuesday, 7 May 2019

अधूरा इश्क़, पूरी मोहब्बत और तुम।













Pic credit : Google.








मैं तन्हा
नहीं हूँ
तुम्हारा 
अधूरा
इश्क़ मेरे 
साथ है।

तुम्हारी कही
हर बात है।
बिछड़ने का
गम हो या
मिलने की 
आस हो।

अधूरा इश्क़
को पूरी
मोहब्बत का
इंतज़ार है।

©नीतिश तिवारी।

Monday, 6 May 2019

लघुकथा--बेटी का बाप।










Image courtesy: pinterest.









लघुकथा--बेटी का बाप।

गुप्ता जी ने जैसी ही पंडाल में अपने बेटे को कई लोगों के साथ बहस करते देखा तो दौड़कर पंडाल की तरफ भागे। 
"क्या हुआ बेटा सोनू, शोर क्यों मचा रहा है?" गुप्ता जी ने बड़े हैरानी से अपने बेटे से पूछा।
"देखिये ना पिताजी, मुझे कोल्ड ड्रिंक पीना है और ये लड़की वाले कह रहे हैं कि कोल्ड ड्रिंक खत्म हो गया।"
सोनू ने गुस्से भरे स्वर में जवाब दिया।
गुप्ता जी अपने बेटे को समझा ही रहे थे कि इतने में बेटी का बाप आ पहुँचा और हाथ जोड़कर बोला।
"माफ करना बेटा, कोल्ड ड्रिंक खत्म हो गयी है, लेने के लिए भेजा है। अभी थोड़ी देर में आ जायेगी।"
गुप्ता जी से रहा नहीं गया। उन्होंने तुरंत उनका हाथ पकड़कर बोला। "रहने दीजिए समधी जी। शादी में कम ज्यादा होता रहता है। आपको कोल्ड ड्रिंक मंगाने की कोई जरूरत नहीं है। मैंने भी पिछले वर्ष अपनी बिटिया की शादी की थी। मैं समझ सकता हूँ। मैं भी एक बेटी का बाप हूँ।"
अग्रवाल जी अपने आँसू नहीं रोक पा रहे थे। सोनू शर्मिदा होकर वहाँ से चला गया।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 1 May 2019

NDTV के क्रांतिकारी पत्रकार Ravish Kumar ने अपने एक Fan को थप्पड़ मारा!














हाँ जी, बिल्कुल सही पढ़ा आपने। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में क्रांतिकारी पत्रकारिता करने वाले एक ही पत्रकार हैं और उनका नाम है रविश कुमार।  वही रविश कुमार जो कभी स्क्रीन काली कर लेते हैं तो कभी सिर्फ ऐसे लोगों को इंटरव्यू के लिए बुलाते हैं जो सरकार के खिलाफ जमकर जहर उगलते हैं। खैर, ये उनका काम है और वो करते रहेंगे।

लेकिन एक बात मानना पड़ेगा कि भाई साहब रिपोर्टिंग बड़ी धाँसू करते हैं। मतलब मैं तो इनका फैन ही हो गया हूँ। एक किताब भी इनकी पढ़ी थी- इश्क़ में शहर होना। काबिल-ऐ-तारीफ लिखा है इन्होंने। समय मिले तो जरूर पढ़िए। 

अब जबकि हम रविश कुमार के फैन हो ही चुके थे तो पिछले दिनों चले गए इनसे मिलने। NDTV के ऑफिस पहुंचे तो पता चला कि साहब बेगूसराय गए हैं कन्हैया के प्रचार की कवरेज और इंटरव्यू के लिए। फिर क्या था, हमने भी बैग पैक किया और अगले ही दिन बेगूसराय के लिए निकल पड़े। सोंचा, इसी बहाने कन्हैया के चुनावी जमीन के बारे में भी पता चल जाएगा।

कई घंटों के लंबे सफर के बेगूसराय पहुँचा। सीधे रविश कुमार के होटल पहुँचा। मिलने के लिए हमने दिल्ली से ही appointment ले लिया था इसलिए कोई दिक्कत नहीं हुई। होटल के कमरे का दरवाजा रविश कुमार के कैमरामैन ने खोला। 

"रविश जी, नमस्कार । मैं नीतिश, दिल्ली से आया हूँ आपसे मिलने।"
"आइये नीतिश जी, बैठिए।"
रविश कुमार ने हल्के मुस्कान के साथ मेरा स्वागत किया। शायद उन्होंने मेरा ट्विटर bio पढ़ लिया था कि मैं मोदी भक्त हूँ।
खैर, चाय नाश्ते के बाद रविश जी से असली बातचीत शुरू हुई।

मैंने कहा, "सर मैं आपका बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ और इसलिए इस चुनावी सरगर्मी के बीच आपसे मिलने यहाँ तक चला आया हूँ।"
"जी, धन्यवाद।" रविश जी ने आभार व्यक्त किया।
"रविश जी, मैं आपसे कुछ सवाल पूछना चाहता हूँ। कई दिनों से आपके बारे में जानने की जिज्ञासा है।"
"तो आप एक पत्रकार का इंटरव्यू लेने आये हैं?"
रविश कुमार ने हैरानी भरे हाव भाव के साथ पूछा।
"पत्रकार नहीं सर, आप तो क्रांतिकारी पत्रकार हैं और ये इंटरव्यू नहीं है बल्कि ये तो वो साक्षात परम ज्ञान है जो आज आपसे मुझे मिलने वाला है।"
"ठीक है, पूछिए।"
मैंने कहा,"सबसे पहले तो मैं ये जानना चाहता हूँ कि जो कन्हैया कुमार 'पूंजीवाद से आजादी' के नारे लगाता था । उसी का आज के अखबार के पहले पन्ने पर चुनावी ad है। इसके बारे में क्या कहेंगे?"
"देखिए, ऐसा है कि चुनाव में कैंडिडेट खड़ा हुआ है तो प्रचार तो करेगा ना। जहाँ तक पैसे की बात है तो जनता ने सहयोग किया है। एक गरीब छात्र नेता है। मोदी जी की तरह अंबानी और अडानी से पैसे नहीं मिला है ना।"
"ठीक है, चलिए मान लिया आपकी बात। अच्छा ये बताइये कि अभी जो मोदी जी और अक्षय कुमार का अपोलिटिकल इंटरव्यू था, उस पर भी आपको दिक्कत है। आपने ब्लैक स्क्रीन करके अपोलिटिकल प्राइम टाइम चला दिया?"
"अब क्या करें, किसी को तो जवाब देना पड़ेगा। आखिर इस तरह के इंटरव्यू का मकसद क्या था? किसने इसे फंड किया?"
"मतलब आप मानते हैं कि मोदी जी की कोई भी बात हो, चाहे उनका शूट हो, चौकीदार वाली बात हो या विदेशी दौरा। सबका विरोध करना आपका जन्मसिद्ध अधिकार है?"
"हाँ कुछ ऐसा ही समझ लीजिए। भाई trp भी तो चाहिए।"
"रविश जी, आप अपने फेसबुक पोस्ट पर कमेंट्स पढ़ते हैं, कितना विरोध होता है आपकी बातों का?"
"हाँ, पढ़ता हूँ और मैं ये दावे के साथ कह सकता हूँ कि सब भाजपा के IT सेल वाले लोग ही अनाप शनाप लिखते हैं।"
"रविश जी, मैंने आपका कई दिनों के प्राइम टाइम का विश्लेषण किया है। बहुत बढ़िया कवरेज किया था आपने। चाहे वो SSC का कवरेज हो, युवाओं में बेरोजगारी की बात हो, पर्यावरण की बात हो या फिर रेलवे के परीक्षा सेंटर दूर दिए जाने की। लेकिन हर कवरेज के आखिर में आप मोदीजी पर दोष देकर सब गुड गोबर कर देते हैं। आपका क्या कहना है?"
"मेरा बस यही कहना है कि सरकार से ही तो सवाल पूछा जाएगा।"
"लेकिन सरकार तो पहले भी थी। आपकी क्रांतिकारी पत्रकारिता पहले नज़र नहीं आती थी।"
" भाई साहब, पहले की सरकारों के खिलाफ बोलने पर trp नहीं मिलता था ना।" 
"मतलब आप सबकुछ trp के लिए ही करते हैं?"
"जी हाँ, उसी बात का तो पैसा मिलता है।"
"ठीक है रविश जी लेकिन एक बात समझ नहीं आयी। बजट के दौरान चर्चा करते वक़्त आपने कहा कि सरकार ने फलाने योजना में 5000 करोड़ आवंटित किए थे, जिसमे से सरकार केवल 4500 करोड़ ही खर्च कर पायी। ये कैसा तर्क है?"
"हाँ मतलब सही तो है। सरकार को पूरा पैसा खर्च करना चाहिए था।"
"चलिए रविश जी, अब जाने का वक़्त हुआ, लेकिन जाते जाते आखिरी सवाल। कौन जात हो?"

ये सवाल पूछना था कि रविश कुमार ने एक जोरदार तमाचा मेरे गाल पर जड़ दिया। तमाचे की झनझनाहट से मेरी नींद खुल चुकी थी। रात का ये भयानक सपना टूट चुका था। मैं सोचने लगा कि 3 महीने पहले रविश कुमार ने सही कहा था कि चुनाव तक न्यूज़ चैनल देखना बंद कर दीजिए।

©नीतिश तिवारी।

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