मैंने तो कहा था कि मुझे भूल जाओ,
पर तुम्हारी ही ज़िद थी याद करने की।

ना दिल दिया कभी, ना कभी प्यार किया,
फिर कौन सी वजह है मुझे याद करने की।

सूखे पत्ते, बिखरे मोती, सब कुछ अंजान,
ये मौसम नहीं है अब याद करने की।

बगावत, सियासत, उल्फत और शिकायत,
ये कैसी सज़ा मिली है तुझे याद करने की।

©नीतिश तिवारी।

ये भी देखिए: