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Showing posts from June, 2018

Mohabbat aur Kejriwal.

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आजकल लोग मुझसे बहुत सवाल पूछ रहे हैं। लगता है वो मुझे भी केजरीवाल समझ रहे हैं। मैं तेरी गली में बवाल करना चाहता हूँ। मैं मोहब्बत में केजरीवाल होना चाहता हूँ। ©नीतिश तिवारी।

रात की तन्हाईयाँ।

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रात की तन्हाईयाँ और तुम्हारी खामोशियाँ दोनो एक साथ  मौजूद क्यों हैं। ये कैसा सितम है मुझ पर या कोई ज़ुल्म किया है हालात ने। खयालों के ख्वाब बुनते-बुनते मैं थक सा गया हूँ भीड़ में तुम्हें ढूंढते-ढूंढते मैं थक सा गया हूँ। मशाल की तलाश है पर एक चिंगारी भी मौजूद नहीं मैं तुझको कैसे भुला दूँ ये समझदारी भी मौजूद नहीं। ©नीतिश तिवारी।

एहसास होता है।

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प्यार में हो जब तो ये एहसास होता है, दूर हो महबूब फिर भी पास होता है। वक़्त गुजर जाये चाहे सदियाँ बीत जाएं, एक दिन वो आएंगे बस यही आस होता है। ©नीतिश तिवारी।

तुम्हारी माँग का सिंदूर।

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ये जो तुम्हारी माँग में सिंदूर है ना ये सिर्फ सिंदूर नहीं बल्कि मेरे जीवन का दस्तूर है। और ये तुम्हारी माथे की बिंदिया प्रतीक है मेरी उन्नति का प्यार में और जीवन में भी। ये तुम्हारी सुरमयी आँखों का काजल सम्मोहित करता है तुम्हें जी भरके निहारने को बस तुम्हीं में खो जाने को। तुम्हारे होठों की लाली का ऐसा जादू है कि शब्द कम पड़ जाते हैं तारिफ में फिर भी मैं  अपने को कवि कहता हूँ। ©नीतिश तिवारी।

तुम भी कभी हमारे थे।

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अकेले दरिया पार किया, मेरा साथी छूटा किनारे पे, मंज़िल तो छूटनी ही थी, जब रास्ता भटका चौराहे पे। बिखर गए थे ख्वाब मेरे, पर तुम्ही ने तो सँवारे थे, याद आता है वो लम्हा, जब तुम भी कभी हमारे थे। बरसात की बूँदें और तुम्हारे आँसू, दोनों को हमने संभाले थे, तेरे आँचल की छाँव में, कई लम्हे हमने गुजारे थे। कभी यकीन ना था कि तुमसे हम बिछड़ जाएंगे, तेरी मोहब्बत में तुझसे ज्यादा हम खुदा के सहारे थे। ©नीतिश तिवारी।