Two line shayari

चाहे लाख मेहंदी लगा ले किसी और के नाम की,
तेरे हाथों की लकीरों से अब मैं नहीं मिटूँगा। 

नफरतों का दौर तो तुम्हारे शहर में होता होगा,
हमारे यहाँ तो आम भी पत्थर से नहीं हाथ से तोड़ते हैं।

©नीतिश तिवारी