Wednesday, May 30, 2018

Kaun kiska- Zee News BJP ka ya NDTV congress ka?

Kaun kiska- Zee News BJP ka ya NDTV congress ka?















जी हाँ दोस्तों, अगर आप आजकल न्यूज़ चैनलों को देखेंगे तो ऐसा ही लगेगा कि सारे चैनल किसी ना किसी पार्टी से संबंध रखते हैं। आइये शुरुआत ज़ी न्यूज़ से ही करते हैं। इस चैनल को देखकर लगता है कि देश का सबसे बड़ा राष्ट्रवादी चैनल बस यही है। इसके सबसे बड़े एंकर में से एक सुधीर चौधरी का अगर बस चले तो ये आज ही पाकिस्तान पर हमला करके उसे भारत में मिला दें। आइये अब बात करते हैं NDTV की। इस चैनल पर हमेशा ये आरोप लगता है कि ये वामपंथियों और कांग्रेसियों का चैनल है। इस चैनल के दो सबसे बड़े चर्चित एंकर बरखा दत्त और रविश कुमार हैं। बरखा मैडम के interview लेने की कला पर अगर आप गौर करेंगे तो पता चलेगा कि दुनियाँ के सारे नकारात्मक और विवादित सवाल सिर्फ इनके दिमाग में ही आते हैं। इन्हें ऐसा लगता है कि विवाद पैदा करना मिडिया का जन्मसिद्ध अधिकार है। अरे भईया TRP का भी मसला है। अब बात करते हैं रविश कुमार की। ये भी बहुत चर्चित रहते हैं। कभी अपने ब्लॉग के लिए तो कभी अपने फेसबुक पोस्ट के लिए। इनको इस बात का सबसे बड़ा मलाल है कि मोदी जी इनको interview नहीं दे रहे हैं। भाई साहब जब आप देश विरोधी नारे लगाने वाले कन्हैया का interview लेने में सबसे आगे रहोगे तो आपको मोदी जी के interview की क्या जरूरत है। 
अपने आप को मीडिया जगत के धुरंधर मानने वाले दो और लोग हैं। पहला नाम है अर्नब गोस्वामी का और दूसरा नाम है अमीश देवगन का। इन दोनों का ज़िक्र मैं एक साथ इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि दोनों लगभग जुड़वा भाई लगते हैं। शक्ल से नहीं बल्कि इनके डिबेट करने के अंदाज़ से। इन दोनों के कार्यक्रम को डिबेट नहीं, डिजिटल अखाड़ा का नाम दिया जाए तो गलत नहीं होगा। हाँ,मतलब कार्यक्रम में प्रवक्ता को बुलाकर उसकी बेज्जती करना कोई इनसे सीखे। अर्नब गोस्वामी तो चिल्लाने के मामले में सन्नी देओल को भी पीछे 
छोड़ देते हैं। 


एक और साहब हैं जिनका नाम है- पुण्य प्रसून वाजपेयी। ये भी मोदी जी का interview लेना चाहते हैं पर इनको भी रविश कुमार की तरह अभी तक सफलता नहीं मिली है। इसलिए ये समय- समय पर दूसरे शायरों की शायरी के जरिए ट्वीट करके मोदी सरकार पर कटाक्ष करते रहते हैं। 

बस, अब ज्यादा नहीं लिखूंगा नहीं तो ये तमाम लोग मेरे खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर देंगे। और मुझे तो केजरीवाल की तरह माफी माँगना भी नहीं आता।
पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो शेयर कीजिए।

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©नीतिश तिवारी।

Tuesday, May 15, 2018

मेंहदी किसी और के नाम की।

















चाहे लाख मेहंदी लगा ले किसी और के नाम की,
तेरे हांथों की लकीरों से अब मैं नहीं मिटूँगा ।

नफरतों का दौर तो तुम्हारे शहर में होता होगा,
हमारे यहाँ तो आम भी पत्थर से नहीं हाथ से तोड़ते हैं।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, May 6, 2018

बरस रही हो तुम।
























बिखरी ज़ुल्फ़ों में भी सँवर रही हो तुम,
शायद मेरे रूप से और निखर रही हो तुम,
जब से तुम्हें देखा है सारी प्यास मिट गयी,
बिना बादल के भी बरस रही हो तुम।
©नीतिश तिवारी।

Saturday, May 5, 2018

जिन्ना-जिन्ना करते हो तुम...
























जिन्ना- जिन्ना करते हो तुम, तुमको चाहिए आज़ादी,
भगत सिंह जो फाँसी पर चढ़े वो बोलो फिर क्या थी।

देश में रहकर देशद्रोही बनते फिरते हो तुम,
ये काम किसी और के इशारे पर करते हो तुम।

सालों पहले देश बँट गया तुम जैसे लोगों के कारण,
इस बार देश नहीं बंटेगा चाहे कर लो कितने जतन।

पढ़ने की जगह पर तुम सिर्फ नारे लगाने जाते हो,
भारत में रहकर तुम क्या पाकिस्तान का खाते हो।

कितना भी तुम चिल्ला लो, इन नारों में वो बात नहीं,
बाहरी आदमी देश बँटवा दे उसकी अब औकात नहीं।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, May 2, 2018

एहतराम किया।
























तुम्हारी खामोशियों का एहतराम किया है मैंने,
अपनी ग़ज़ल को भी तेरे नाम किया है मैंने।

अपनी पलकों से आँसू को निकलने ना दिया,
अपने जज़्बात को तेरा गुलाम किया है मैंने।

यूँ तो बर्बाद हो गया मैं तेरी मोहब्बत में लेकिन,
फ़कीरी में भी दाना-पानी का इंतज़ाम किया है मैंने।

©नीतिश तिवारी।