Wednesday, April 18, 2018

गले लग जाती हो।























लफ्ज़ भी गुलाम हो जाते हैं मेरे,
जब तुम अपना बनाने का इशारा करती हो।
धड़कनों को हर बार सुकून मिल जाता है,
जब तुम चुपके से आकर गले लग जाती हो।

@नीतिश तिवारी।

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