आधे से ज्यादा, पूरे से कम। वो नहीं मिली, इसका मुझे नहीं है कोई गम। हाँ पर दिल को तसल्ली जरूर देता हूँ कि वो अच्छी तो थी। मेरे दिल के बंजर ज़मीन में एक प्यार की सुनहरी बीज को उसने बो जरूर दिया था। वो अलग बात है कि उसके द्वारा बोया गया बीज अब पौधा बनकर किसी और की बगिया को रौशन कर रहा है। और इस पौधे को बाग के मालिक से शिकायत जरूर है। ठीक से पानी नहीं मिलने के कारण इसमें काँटे निकल आये हैं। जो नए बीज पनपने नहीं देते और एक डर सा लगा रहता है कि क्या पौधे का वज़ूद खत्म होने वाला है। तुम्हारे प्यार की बस इतनी सी निशानी थी। जो लिख दिया हमने बस वही एक कहानी थी।

©नीतिश तिवारी।