कल उसकी आँखों में अपनी तस्वीर नजर आयी।
ज़ुल्म देखिए आज वो नक़ाब पहने बैठे हैं।।

फिर जिंदगी की एक नई शुरुआत होने को है,
सूखे बंजर में बरसात होने को है, 
तड़पता रहा उम्र भर जिस शख्स के खातिर,
उस शख्स से आज मुलाकात होने को है।

ख्वाहिशें अगर तुमसे हैं जिंदा तो चल साथ मेरे,
तेरे हर धड़कन की इबादत अब मैं करूँगा,
रंजिशें हैं जमाने में अगर हमारी मोहब्बत के खातिर,
तो मरते दम तक इस जमाने से मैं लड़ूंगा।

©नीतिश तिवारी।