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Showing posts from March, 2016

मोहब्बत में उधारी।

तुझसे मिलने को जी भर के तैयारी ली हमने, तुझसे इश्क़ करने की बीमारी कर ली हमने, ये जानता था की कभी ना चुका पाउँगा तेरा कर्ज, फिर भी मोहब्बत में क्यों उधारी कर ली हमने। तेरे खयालों में हर बार खो जाने के बाद भी, ना जाने कितनी रातें बिना सोये गुजारी हमने, बरसों की ख्वाहिश अधूरी रही पर हौसला ना रुका, सिर्फ तेरे खातिर बिना रोज़े के इफ्तारी कर ली हमने। ©नीतिश तिवारी।

बचपन की वो होली।

याद आती है मुझे बचपन की वो होली, लोगों से भरी हुई वो गली, और सबके हाथों में गुलाल की थैली। याद आती है मुझे बचपन की वो होली, वो पिचकारी में रंग का भरना, भागते भागते किसी के ऊपर गिरना। दोस्तों को चुपके से रंग लगाना, वो मुझे देखकर भाभी का शरमाना, शरमाती हुई भाभी को रंग लगाना, और बदले में जी भर के उनसे रंग लगवाना। याद आती है मुझे बचपन की वो होली, वो मीठी सी भोजपुरी बोली, और साथ में हंसी की ठिठोली। ©नीतिश तिवारी।

मैंने दीदार किया।

मैं आफताब बनके उसको रौशन करता रहा, वो महताब बनके मुझमें पिघलती रही। मेरे अल्फ़ाज़ उसकी तारीफ़ में ग़ज़ल बन गए, उसके जज़्बात ना जाने कब मुझमें घुल गए। इस मोहब्बत की तलब में इंतज़ार किया है उसका, जब जब पर्दा उठा, मैंने दीदार किया है उसका। मेरी ज़िन्दगी रौशन होती गयी उसके नूर, खुदा का शुक्रिया जो मिलाया मुझे ऐसी हूर से। ©नीतिश तिवारी।

नारी शक्ति को नमन।

पुरुष प्रधान समाज में, नारी की ये परीक्षा है।  मुश्किल से मिलता हक़ इनको, ये नारी की दुखद व्यथा है।  जब सीता जैसी नारी को अग्निपरीक्षा देनी पड़े, जब वीर लक्ष्मीबाई को अंग्रेज़ों से लड़ना पड़े. जब कल्पना चावला को देश की खातिर मरना पड़े, जब मैरी क़ौम को विरोधी से लड़ना पड़े। इसे ज़रूरत कहें या मजबूरी, हर नारी ने दिखाई है दिलेरी, अदम्य साहस का परिचय दिया है जिसने, उस नारी शक्ति को नमन करता हूँ।  कभी माँ बनकर,कभी बहन बनकर, कभी दोस्त बनकर, कभी पत्नी बनकर, हर मुश्किल हर घड़ी में साथ निभाती है जो, उस नारी शक्ति को नमन करता हूँ। ©नीतिश तिवारी।

तेरा सज़दा करूँ।

तेरा  सज़दा  करूँ और तू मिल जाए , खुदा ऐसी तकदीर हर किसी को दे।  अंधेरे की कीमत,उजाले की तस्वीर, वाह रे खुदा,गजब की बनाई है तुमने तकदीर।  ©नीतिश तिवारी।

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