Friday, 29 March 2019

इंतज़ार और आचार संहिता।


















अगर शब्दों में पिरो दूँ तुम्हें तो मेरी अमृता हो तुम,
इज़हार कैसे करूँ, चुनावी आचार संहिता हो तुम।


इंतज़ार की घड़ी खत्म हुई अब ऐतबार होगा,
तू जमाने की परवाह मत कर, अब सिर्फ प्यार होगा।


©नीतिश तिवारी।

2 comments:

  1. बहुत सुंदर पंक्तियां
    मेरे ब्लॉग को फोलो करें
    https://poetrybyanuradha.blogspot.com/?m=1

    ReplyDelete