Monday, 4 February 2019

क़ातिल अदा।

Katil Ada.


तेरे रूप की रौशनी से मेरे ख्वाब कामिल होंगे,
तेरे जिस्म की खुशबू को सिर्फ  हासिल हम होंगे।
अपनी कातिल अदा को किसी और के नाम मत करना,
तेरे हुस्न की हर महफ़िल में सिर्फ शामिल हम होंगे।

©नीतिश तिवारी।

14 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा आज मंगलवार (05-02-2019) को "अढ़सठ बसन्त" (चर्चा अंक-3238)
    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद।

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  2. क्या बात ...
    हम ही होंगे हर जगह ... शानदार ...

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद सर।

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  3. बहुत खूबसूरत...., लाजवाब सृजनात्मकता ।

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

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  4. बहुत सुंदर रचना

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  5. ...लाजवाब पंक्तिया

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

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  6. तेरे रूप की रौशनी से मेरे ख्वाब कामिल होंगे....
    बेहतरीन शायरी, उम्दा लेखन। हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीय नितीश जी।

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    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

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