Saturday, 1 December 2018

मोहब्बत में शह और मात।

























तुम्हें क्या बताएँ दोस्तों दिल की दास्तान,
मोहब्बत में हमने शह और मात देखी है,

मेरी नम आँखों को देखकर आप हैं हैरान,
बिना बादल के हमने एक बरसात देखी है।

चाँद छुपता रहा चाँदनी के आगोश में,
फिर भी तन्हाई वाली हमने वो रात देखी है।

ज़ुल्फ़ें सँवरती रही न जाने किस किस की,
अपनी उलझनों की हमने सौगात देखी है।

अब मंज़ूर नहीं मोहब्बत के कायदे हमको,
इस खेल में शतरंज की हर बिसात देखी है।

©नीतिश तिवारी।

4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (02-12-2018) को "अनोखा संस्मरण" (चर्चा अंक-3173) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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  2. बहुत बढ़िया

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