Monday, 31 December 2018

Why Thackeray's trailer is different in Hindi & Marathi?

Saturday, 29 December 2018

Tera haal kya hai!
























तुम बताओ तो सही तेरा हाल क्या है,
जवाब दे दूँगा मैं तेरा सवाल क्या है।

जी करता है तुझे एक गुलाब दे दूँ,
इस बारे में तेरा खयाल क्या है।

 सर्दी में भी माहौल गर्म हो रहा है,
जरा पता तो करो ये बवाल क्या है।

मेरा दिल तो रोज़ धड़कता है यहाँ,
उधर तेरे दिल का हाल क्या है।

©नीतिश तिवारी।


ये भी देखिए। 


Why congress is demanding ban on the movie- The Accidental Prime Minister.

















Why congress is demanding ban on the movie- The Accidental Prime Minister.


हाँ जी भईया, तो बात ये है कि मनमोहन सिंह जी की जीवनी पर एक फ़िल्म बनकर तैयार है जिसकी रिलीज़ की तारीख 11 जनवरी 2019 तय की गई है। फ़िल्म का नाम है- The Accidental Prime Minister. फ़िल्म पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू के किताब पर आधारित है। फ़िल्म में मनमोहन सिंह का किरदार अनुपम खेर ने निभाया है और संजय बारू का किरदार अक्षय खन्ना ने। और भी कुछ मंझे हुए कलाकार हैं जिन्हें देखना दिलचस्प रहेगा।

अब मीडिया सलाहकार का सीधा सा मतलब है कि आपके सरकार और कार्यकाल के बारे में बहुत सारी जानकारी रखना। जाहिर सी बात है कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान संजय बारू उनके मीडिया सलाहकार थे तो उनको भी बहुत सारी ऐसी बातें पता होंगी जो आम लोगों को नहीं पता है। तभी उन्होंने किताब भी लिखी थी।

अब आप सोंच रहे होंगे कि इसमें नया क्या है? बहुत सारे लोगों के बारे में किताब लिखी जाती है और उनपर फ़िल्म भी बनती है। नयी बात ये है कि फ़िल्म का ट्रेलर आते ही विवादों में घिर गई है। और कांग्रेस द्वारा इस फ़िल्म पर बैन लगाने की माँग भी की जा रही है। बैन इसलिए कि 2019 का आम चुनाव नजदीक है और फ़िल्म भी जनवरी में ही रिलीज़ हो रही है। काँग्रेस पार्टी को लगता है कि इससे उनका बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।  भाई, फायदा तो वैसे भी नहीं होने वाला। 2019 में तो मोदी जी ही आएँगे। रही बात बैन लगाने की तो लगा दो। गिने चुने राज्यों में तो काँग्रेस की सरकार है। कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला।

इसमें कोई शक नहीं है कि मनमोहन सिंह जानकार और ईमानदार आदमी हैं। लेकिन उस ईमानदारी का क्या फायदा जब एक के बाद एक घोटाले हुए हों और आप देश के प्रधानमंत्री रहकर भी कुछ ना कर पाए। राजा के यहाँ नौकरी करनी अच्छी बात है लेकिन राजा का गुलाम बनना नहीं। अगर मनमोहन सिंह अपने पद का पूरा इस्तेमाल किये होते तो शायद उनको सबसे कमजोर प्रधानमंत्री ना कहा जाता। ना ही किताब लिखी जाती और ना ही फ़िल्म बनाई जाती। रही बात सोनिया गाँधी की तो वो लगभग राजनीति से सन्यास ले चुकी हैं और राहुल गाँधी को उनके ही पार्टी के लोग सीरियसली नहीं लेते।  3 राज्यों में जीतकर काँग्रेस जरूर इतरा रही होगी लेकिन ये काँग्रेस की जीत से ज्यादा NOTA और भाजपा की गलतियों का परिणाम था।
हाँ, एक बात जरूर है कि फ़िल्म रिलीज़ होने से बहती गँगा में हाथ धोने का काम भाजपा वाले जरूर कर लेंगे।

अनुपम खेर का कहना है कि इस फ़िल्म में उन्होंने अपने जीवन का बेहतरीन काम किया है। ठीक है, हो जाने दीजिए रिलीज़, देख लेंगे सबका काम। वैसे भी मेरा मानना है कि एक फ़िल्म के आ जाने से मनमोहन सिंह की छवि ना तो अच्छी हो जाएगी और ना ही बुरी। जैसी थी वैसी ही रहेगी। 

और एक बात बता दूँ आपको।
2019 में तो मोदी जी ही आएंगे।

पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद। अच्छी लगी हो तो शेयर कर दीजियेगा।

©नीतिश तिवारी।


ये भी देखिए। 



Tuesday, 25 December 2018

Ishq mein bagawat. इश्क़ में बगावत।




















सुनो,
तुम्हें ये बार-बार
जो इश्क़ में
बग़ावत करने का
मन करता है ना
तो आज ही कर लो
इश्क़ में बग़ावत।

और फिर देखना,
तुम मेरी सियासत
इश्क़ में।

ये जो कबूतर
रोज तुम्हारी छत
पर बैठते हैं ना
उनको दाना हम डालेंगे
और उन्ही कबूतरों से
संदेशा भिजवाएंगे
किसी और के नाम।

इश्क़ को तिज़ारत
बनाने की जुर्रत
जो तुमने की है
उसकी सजा मुझे
मिल रही है।

लेकिन तुम परेशान
मत होना कभी
मोहब्बत में इबादत
मैं करूँगा
अपने इश्क़ की हिफाज़त
मैं करूँगा।

©नीतिश तिवारी।



Sunday, 23 December 2018

Romantic shayri.





























ये रौशनी और उनका दीदार,
ये बरसात और मौसम का खुमार,
मुझे तड़पाये उनके आने का इंतज़ार,
ना जाने कब होगा ये त्योहार।

तेरी आँचल से छुपा लूँ अपने दामन को,
तेरी खुशबू से महका लूँ अपनी साँसों को,
कशिश है तुम्हारे आने की बस एक बार,
तेरी नींदों से जगा लूँ अपने ख्वाबों को।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 14 December 2018

Mehndi Rachaye toh hoge.

























कुछ रंग प्रीत के सजाए तो होगे,
गीत मेरे कभी गुनगुनाए तो होंगे।

जानता हूँ तुम्हें कोई भाता नहीं है,
तुम मुझे देखकर मुस्कुराए तो होगे।

उलझनों से सुलझती मोहब्बत हमारी,
मेरे दिल में है बसती ये चाहत तुम्हारी।

मुझको आने लगी है अजब खुशबू,
हाथ मेंहदी से तुमने रचाए तो होंगे।

©नीतिश तिवारी।

Thursday, 6 December 2018

तुझे याद करने की।
























मैंने तो कहा था कि मुझे भूल जाओ,
पर तुम्हारी ही ज़िद थी याद करने की।

ना दिल दिया कभी, ना कभी प्यार किया,
फिर कौन सी वजह है मुझे याद करने की।

सूखे पत्ते, बिखरे मोती, सब कुछ अंजान,
ये मौसम नहीं है अब याद करने की।

बगावत, सियासत, उल्फत और शिकायत,
ये कैसी सज़ा मिली है तुझे याद करने की।

©नीतिश तिवारी।

Saturday, 1 December 2018

मोहब्बत में शह और मात।

























तुम्हें क्या बताएँ दोस्तों दिल की दास्तान,
मोहब्बत में हमने शह और मात देखी है,

मेरी नम आँखों को देखकर आप हैं हैरान,
बिना बादल के हमने एक बरसात देखी है।

चाँद छुपता रहा चाँदनी के आगोश में,
फिर भी तन्हाई वाली हमने वो रात देखी है।

ज़ुल्फ़ें सँवरती रही न जाने किस किस की,
अपनी उलझनों की हमने सौगात देखी है।

अब मंज़ूर नहीं मोहब्बत के कायदे हमको,
इस खेल में शतरंज की हर बिसात देखी है।

©नीतिश तिवारी।