Monday, 29 October 2018

लघुकथा- माशूक़ा का कॉन्ट्रैक्ट।






















माशूक़ा का कॉन्ट्रैक्ट।

भोला यादव इश्क़ में नाक़ाम हो जाने के बाद शहर के मशहूर डॉन अज्जू भाई के पास काम के लिए पहुँच चूका था। अपराध की दुनिया में अज्जू भाई को नए लड़कों को काम देने के लिए जाना जाता था।
"अज्जू भाई ये नया लड़का गैंग ज्वाइन करना चाहता है। " अज्जू भाई के ख़ास ने उनसे परिचय करवाते हुए कहा।
"क्या नाम है रे तेरा ?"
"जी, भोला, भोला यादव।"
"ठीक है भोला ये ले फोटो।  इसके पीछे पूरी डिटेल लिखी हुयी है। इसको कल टपकाना है।"
अज्जू भाई ने बिना देर किये हुए फोटो का लिफाफा थमा दिया और काम पर लग जाने को कहा।

भोला ने जैसे ही लिफ़ाफ़ा खोला, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। फोटो एक लड़की की थी। वही लड़की जिसने प्यार में भोला को ये कहकर धोखा दिया था कि 'तुम अभी भोले हो।' फोटो के पीछे कल लड़की को मारने का समय लिखा था- शाम को 5 बजे सिटी मॉल के बाहर।

भोला ने बिना किसी देरी किये अज्जू भाई को फोन मिलाया।
"भाई, मैं भोला।"
"हाँ, बोल।"
"भाई इस लड़की को कौन मरवाना चाहता है?"
"अरे तुझे उससे क्या? जो काम दिया है चुपचाप उसे कर।"
"पर भाई बताओ तो।"
"इसका पति इसे मरवाना चाहता है, उसी ने इसकी सुपारी दी है।"
भोला ने फोन काट दिया और सोचने लगा कि कैसे वो एक लड़की को मार पायेगा जिससे उसने कभी प्यार किया था।

रात भर के सोंच विचार के बाद उसने निर्णय लिया कि उसके पास कोई विकल्प नहीं है। क्योंकि वो ये मर्डर नहीं करेगा तो अज्जू भाई उसे छोड़ेंगे नहीं।

अगले दिन शाम को चार बजे से ही भोला और उसके साथी सिटी मॉल के बाहर जमा हो गए। भोला ने काम करने का निर्णय तो ले लिया था लेकिन उसके मन में एक अजीब सा द्वन्द चल रहा था। अचानक उसने मोबाइल निकाला और मैसेज टाइप किया। 
"मैं तुम्हें शाम को 5 बजे सिटी मॉल के बाहर शूट करने वाला हूँ, अपनी जिंदगी चाहती हो तो मत आना।"
तुम्हारा भोला।
मैसेज सेंड करके उसने उसे डिलीट कर दिया और घड़ी की तरफ देखने लगा , अभी भी 5 बजने में 20 मिनट बाकी थे।
भोला और उसके साथी एलर्ट हो गए। कुछ ही मिनटों में मॉल के गेट के पास एक कार आकर रुकी, उसमें से एक आदमी और उसके साथ वो लड़की बार आयी। भोला ने तुरंत उसे पहचान लिए। भोला के दिल में एक अजीब सी हलचल हुई।
उसने गन लोड किया और निशाना लगाने लगा, भोला को गुस्सा भी आ रहा था कि वो लड़की आयी ही क्यों जबकि उसने मैसेज कर दिया था। चंद लम्हों में भोला को गोली चलानी ही थी, उसने तुरंत गोली चला दी। लेकिन गोली लड़की को नही बल्कि उसके हसबैंड को लगी। शायद भोला ने अंतिम समय में निर्णय ले लिया था। अपने प्यार को जिंदा रखने की और अपना फर्ज पूरा करने की। 

©नीतिश तिवारी।


Sunday, 7 October 2018

मुलाक़ात होने वाली है.

























आज उनसे एक मुलाक़ात होने वाली है,
जो अधूरी रह गयी थी, वो बात होने वाली है.

चाँद, तारे  सब आ जाओ गवाह बनने,
फिर से वो चाँदनी रात होने वाली है. 

इश्क़ में डूब जाने का लंबा  इंतज़ार किया है मैंने,
अपने महबूब से मोहब्बत की शुरुआत होने वाली है.

भींग जाऊँगा मैं  उन्हें आगोश में लेकर,
आज मोहबत की नयी बरसात होने वाली है. 


©नीतिश तिवारी।

Saturday, 6 October 2018

ऐसा हुनर रहता है।

























तेरे होने से ना जाने क्यों मुझे डर लगता है,
ऐसा तो नहीं कि तेरे पास कोई खंज़र रहता है।

भरोसे के लायक ना तूने मुझे छोड़ा ना ज़माने को,
अब तो इन आँखों में आँसुओं का समंदर रहता है।

मोहब्बत से, रुसवाई से, दोनों से नवाज़ा है तूने,
तुम जैसे लोगों में ही तो ऐसा हुनर रहता है।

यकीं मैं दिलाऊँ भी तो अपने दिल को किस तरह,
जब तेरे जैसा हरजाई इस दिल के अंदर रहता है।

©नीतिश तिवारी।


Monday, 1 October 2018

युद्ध रचाती हो।





जान-जान कहके तुम मेरी जान ले जाती हो,
दूर रहकर भी मोहब्बत का एहसास कराती हो।

ये बिंदी, ये काजल, श्रृंगार नहीं हथियार हैं तुम्हारे,
इन कातिल अदाओं से मेरे दिल में युद्ध रचाती हो।

पलकें झपका के जब नज़रें मिला जाती हो,
घायल बनाकर फिर मेरा इलाज़ कर जाती हो।

ये तुम्हारे जीने की अदा है या मुझे तड़पाने की,
मौसम कोई भी हो बस तुम मुझपे बरस जाती हो।

©नीतिश तिवारी।