Tuesday, 31 October 2017

बदनाम इश्क़।




ये इश्क़ बड़ा बदनाम करता है,
ये बूढ़ों को भी जवान करता है।
जो भी इश्क़ में पड़ता है अक्सर,
वो सुबह को भी शाम कहता है।
©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 17 October 2017

मोहब्बत भी मेहमान।

















हसरतें दिल की सारी नाकाम हो जाती हैं,
आप ना आए तो सुबह से शाम हो जाती है।

छुप कर मोहब्बत करने की लाख कोशिश करें,
फिर भी ये मशहूर सरेआम हो जाती है।

कितनी शिद्दत से रौशन करता हूँ अपने घर को,
बाती दिया की आंधियों के गुलाम हो जाती है।

वक़्त रहते तुम जी भर के मोहब्बत कर लो,
एक उम्र के बाद मोहब्बत भी मेहमान हो जाती है।

©नीतिश तिवारी।

Thursday, 5 October 2017

आजकल मैं इश्क़ कर रहा हूँ।














आजकल मैं इश्क़ कर रहा हूँ,
आजकल मैं बेरोजगार हूँ।
बहुत लोग मेरे पीछे पड़े हैं,
आजकल मैं कर्ज़दार हूँ।

©नीतिश तिवारी।